अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद अब यह नया विवाद सामने आया है।
राष्ट्रपति शाहबुद्दीन ने एक “अनौपचारिक साक्षात्कार” में कहा कि उन्हें शेख हसीना का कोई आधिकारिक इस्तीफा नहीं मिला है। इसके पहले उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि उन्होंने हसीना का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इन विरोधाभासी बयानों के कारण उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है।
छात्र आंदोलन से उठी मांग
अगस्त में शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। अब वही आंदोलनकारी राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति का इस्तीफा संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरिम सरकार का गठन
शेख हसीना के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ने संसद भंग कर 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार नियुक्त करके अंतरिम सरकार का गठन किया था। हालांकि, यह अंतरिम सरकार भी संवैधानिक रूप से वैध नहीं मानी जा रही है क्योंकि 2011 में यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया था।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक शारिन शाजहान के अनुसार, राष्ट्रपति के इस्तीफे का मुद्दा तकनीकी है और लोग इससे ज्यादा परेशान नहीं हैं। देश में आर्थिक संकट, बाढ़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
आने वाले चुनाव
बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) का मानना है कि यदि चुनाव होते हैं, तो वे आसानी से जीत सकते हैं। इसलिए, बीएनपी चाहती है कि राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को टाला जाए ताकि चुनाव में देरी न हो।
इसेस के लिए उपलब्ध होगा।



