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कोमा में थी बिटिया, सबने खो दी बचने की उम्मीद, फिर मां के ‘आशीर्वाद’ से हुआ पुनर्जन्म

एक मां कभी भी अपने बच्चों को मुसीबत में नहीं देख सकती। चाहे बेटा हो या बेटी, अगर उनकी जान को कोई खतरा हो जाए तो मां आराम से नहीं बैठ सकती। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला। अस्पताल में विल्सन रोग (Wilson Disease) से पीड़ित 13 वर्षीय बच्ची का इलाज चल रहा था। ये ऐसी दुर्लभ बीमारी है जिसमें लड़की के अंगों में तांबे का स्तर बढ़ता जा रहा था। इस बीमारी के इलाज में उसे हेपेटाइटिस-ए का भी पता चला। लगभग दो हफ्ते पहले, लड़की कोमा में चली गई। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के पास उसके लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

कोमा में थी किशोरी, लीवर ट्रांसप्लांट से बची जिंदगी

हालांकि, इस सर्जरी से भी मेडिकल टीम को लड़की के पूरी तरह से ठीक होने की उम्मीद बहुत कम थी, लेकिन पूरी प्रक्रिया के दो दिन बाद किशोरी ‘चमत्कारी’ तरीके से ठीक हो गई। देहरादून की इस लड़की को करीब आठ साल पहले विल्सन रोग का पता चला था। हाल ही में दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उसका इलाज शुरू हुआ। इसी बीच हेपेटाइटिस ए की वजह से उसकी हालत और खराब हो गई। एक डॉक्टर ने दावा किया कि हेपेटाइटिस ए उसके पहले से ही डैमेज लीवर के लिए बड़ा झटका था, जिससे उसे तीव्र क्रॉनिक लीवर फेलियर हो गया।

बेहद गंभीर बीमारी से पीड़ित थी 13 साल की बच्ची

डॉक्टर ने बताया कि पीलिया, बिलीरुबिन के स्तर में अत्यधिक बढ़ोतरी के साथ-साथ लीवर के खराब होने का स्पष्ट संकेत था। हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी की वजह से बच्ची कोमा में चली गई थी। इससे उसकी हेल्थ कंडीशन और भी बदतर हो गई। इससे पहले उसे उल्टी के साथ खून भी आने लगा था, जिससे वो खतरनाक तौर पर मौत के करीब पहुंच चुकी थी। उसे तुरंत ही आईसीयू में लाइफ सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता थी।

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