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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई चिंता, नैतिक मूल्यों को बचाने की बात की.

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे रिश्ते समाज के नैतिक मूल्यों के लिए खतरा हैं और इन पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

यह टिप्पणी वाराणसी के केशरी नाम के एक व्यक्ति के मामले में आई थी। केशरी पर एक महिला के साथ शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का आरोप था। केशरी के वकील ने दलील दी कि महिला बालिग थी और दोनों के बीच का रिश्ता आपसी सहमति से था।

कोर्ट ने हालांकि इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को सामाजिक मान्यता नहीं मिली है और युवा पीढ़ी इस तरह के रिश्तों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। कोर्ट ने कहा कि यह समाज के लिए एक बड़ी चुनौती है और हमें इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप से परिवार और समाज की संस्थाएं कमजोर होती हैं। कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसे कानून बनाने की जरूरत है जो लिव-इन रिलेशनशिप को रोक सकें।

यह फैसला देश भर में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है।

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