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केके पाठक बने नीतीश सरकार के लिए ‘ट्रबलमेकर’, राजभवन से जारी विवाद के बीच जारी किया नया फरमान

बिहार के प्रशासनिक महकमे का बहुचर्चित नाम है केके पाठक। आईएएस अधिकारी केके पाठक को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का जिम्मा दे रखा है। उन्हें शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया। हालांकि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उन्हें जाने का अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी अब राज्य सरकार ने जारी कर दिया है। तकरीबन साल भर पहले जून 2023 में नीतीश ने उन्हें यह दायित्व सौंपा था। माना जाता है कि नीतीश कुमार को जिस महकमे को ठीक करना होता है, उसकी जिम्मेवारी वे केके पाठक को सौंपते रहे हैं। शराबबंदी कानून के फेल होने की जब शिकायतें नीतीश कुमार तक पहुंचने लगी थीं, तो उस महकमे की जिम्मेवारी भी केके पाठक को सौंपी थी। उन्होंने कोशिश तो पूरी की, लेकिन सिस्टम ने ही उनका साथ नहीं दिया। पिछले साल भर से वे शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव का दायित्व संभाल रहे हैं।

चर्चित रहे केके पाठक

शिक्षा विभाग का दायित्व संभालते ही उन्होंने पूरे सिस्टम को अपने ढंग से संचालित करना शुरू किया। शिक्षकों के प्रति उनका रवैया हमेशा सख्त रहा। बीत में आए तत्कालीन शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर से पाठक का पंगा भी खूब चर्चा का विषय बना। पाठक अपने कामों में मंत्री की दखलंदाजी नहीं चाहते थे। तनातनी इतनी बढ़ी कि मामला नीतीश कुमार तक पहुंचा। नीतीश ने पाठक की दलील को तरजीह दी। शिक्षा मंत्री ने खफा होकर महीने भर दफ्तर से दूरी बना ली। शिक्षा विभाग में एसीएस का पदभार संभालते ही केके पाठक ने विभाग के तमाम अधिकारियों-कर्मचारियों को अनुशासन में रहने की सख्त हिदायत दी। उनके लिए ड्रेस कोड लागू किया। स्कूलों से नदारद रहने वाले शिक्षकों का वेतन काटने और निलंबन जैसी कार्रवाई का निर्देश दिया। बाद में स्कूल की छुट्टियों में कटौती भी कर दी। स्कूलों का औचक निरीक्षण होने लगा। गैरहाजिर शिक्षकों के वेतन काटे जाने लगे।

विभागीय मंत्री से भी पंगा

केके पाठक के इन फरमानों से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया। तब के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को केके पाठक के फरमान नागवार लगने लगे। उन्होंने टांग अड़ाने की कोशिश की, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के आप्त सचिव कृष्णानंद यादव ने पीत पत्र लिख कर एसीएस के फरमानों पर आपत्ति जताई तो पाठक भड़ गए। उन्होंने शिक्षा विभाग में उनके प्रवेश पर ही पाबंदी लगा दी। इसे लेकर तब सरकार में शामिल आरजेडी और जेडीयू के नेता आपस में ही उलझने लगे। जेडीयू नेता केके पाठक के समर्थन में खड़े हो गए तो आरजेडी के नेता विरोध करने लगे। केके पाठक को शिक्षा विभाग से हटाने की मांग तक होने लगी। आखिरकार मामला नीतीश तक पहुंच गया। नीतीश ने साफ तौर पर केके पाठक का पक्ष लिया। इसी से नाराज होकर चंद्रशेखर ने विभाग में जाना ही महीने भर तक छोड़ दिया।

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