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मुस्लिमों के खिलाफ पुलिस के रवैये पर मौलाना अरशद मदनी का विवादित बयान, हल्द्वानी से लेकर यूपी तक खड़े किए सवाल

जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने हल्द्वानी हिंसा को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में पुलिस फायरिंग और क्रूरता का शिकार हुए लोगों के साथ इस कठिन समय में जमीयत कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जमीयत ने वहां सहायता और राहत कार्य शुरू किया गया है। मौलाना ने हल्द्वानी में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की क्रूरता और बर्बरता का एक लंबा इतिहास है। उन्होंने कहा कि चाहे मलियाना हो या हाशिमपुरा, मुरादाबाद हो या हल्द्वानी, हर जगह पुलिस का एक ही चेहरा देखने को मिलता है। पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना, लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करना है।

हल्द्वानी प्रकरण को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रवक्ता मौलाना फजलुर रहमान कासमी ने मौलाना अरशद मदनी का बयान जारी किया है। जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पुलिस शांति बनाए रखने के बजाए, अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों के साथ एक पार्टी जैसा व्यवहार करती है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि न्याय के दोहरे मापदंड से ही अराजकता और विनाश के रास्ते खुलते हैं। इसलिए कानून का मानक सभी के लिए समान होना चाहिए और धार्मिक रूप से किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि धार्मिक भेदभाव की अनुमति न तो संविधान देता है और न ही देश का कानून। उन्होंने कहा कि देश डर और भय से नहीं बल्कि न्याय और निष्पक्षता से चलता और विकास करता है। अगर देश की एक बड़ी आबादी असुरक्षित महसूस करने लगे तो यह बहुत खतरनाक और निराशाजनक बात है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि याद रखिये लोकतांत्रिक व्यवस्था और समानता से ही किसी भी देश के विकास का मानक तय किया जा सकता है। केवल दावा करने से कुछ नहीं होता।

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