झारखंड में I.N.D.I.A. गठबंधन में सर्वमान्य फॉर्म्युला बन पाना मुश्किल, सीटों के बंटवारे पर अब तक शुरू नहीं हुई बातचीत
झारखंड में तीन पार्टियों जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी की पार्टनरशिप की सरकार चल रही है, लेकिन इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर पार्टनरशिप को बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती है। लोकसभा चुनाव के लिए ‘इंडिया’ की छतरी के नीचे आते ही राज्य में पार्टनर पार्टियों की संख्या तीन से बढ़कर छह हो जाएगी। जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के अलावा जेडीयू, सीपीआई और सीपीआई (एमएल) की ओर से सीटों को लेकर दावेदारियां सामने आ चुकी हैं।
सीटों के बंटवारे पर अब तक शुरू नहीं हुई बातचीत
राज्य में सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर ये पार्टियां अब तक बातचीत की मेज पर नहीं पहुंची हैं और न ही कोई तारीख तय हुई है। इस बीच नए साल की पहली तारीख से राज्य की सरकार को लेकर जिस तरह की आशंकाओं-अनिश्चितताओं और अटकलों का दौर शुरू हुआ है, उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे पर अगले 15-20 दिनों तक बातचीत की संभावना भी कम ही लगती है।
कांग्रेस प्रभारी ने पार्टी नेताओं से दावेदारी पर चर्चा की
2-3 जनवरी को झारखंड प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी गुलाम अहमद मीर रांची में थे। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल और पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक की, जिसमें राज्य में लोकसभा सीटों के लिए दावेदारी पर चर्चा हुई। इसके बाद 4 जनवरी को नई दिल्ली में इस मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से बुलाई गई बैठक में झारखंड से कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने शिरकत की।
कांग्रेस 10 लोकसभा सीटों पर करेगी दावेदारी
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में तय हुआ कि पार्टी झारखंड की 14 में से 10 लोकसभा सीटों पर दावेदारी करेगी। कांग्रेस का मानना है कि झामुमो को प्रदेश की सत्ता में अगुवाई सौंपी गयी है और हेमंत सोरेन की लीडरशिप स्वीकार की गई है, तो बदले में राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस की स्वाभाविक तौर पर बड़ी हिस्सेदारी बनती है। दिल्ली की बैठक से लौटने के बाद प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि झारखंड में लोकसभा सीटों के बंटवारे में कोई दिक्कत है। बगैर किसी विवाद के समय पर सब कुछ तय हो जाएगा।



