हेमंत सोरेन की सरकार अब नहीं बचेगी… सुनते-सुनते बीत गए 4 साल, स्थानीय नीति और ओल्ड पेंशन स्कीम ने बढ़ाया कद
झारखंड के मुख्य्मंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2019 में बूर्ण बहुमत के साथ सीएम पद की शपथ ली थी। कांग्रेस और आरजेडी के समर्थन से बनी सरकार के सामने कई ऐसे मौके आए, जब सरकार जाती दिखी। विपक्ष में बैठी बीजेपी और आजसू पार्टी के नेताओं को इस बात का इंतजार बना रहा कि हेमंत सोरेन की सरकार अब जाने वाली है। अब तो कोई बचा नहीं सकता। इसके बावजूद हेमंत सोरेन ने देखते-देखते चार साल पूरे कर लिए।
हेमंत सोरेन 4 साल में अपनी कई उपलब्धियां गिनाते हैं
सीएम हेमंत सोरेन अपनी सरकार के चार साल की कई उबलब्धियां गिनाते हैं। सरकारी इश्तेहार में उनकी उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा है। वैसे भी जो चीजें सतह पर दिख रही हैं, उनमें सबसे बड़ा काम हेमंत सरकार का यही दिखता है कि उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू की है। छात्रों के लिए गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को आरक्षण, सर्वजन पेंशन, प्री एंड पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी राज्य सरकार की योजनाएं सतह पर दिखती हैं। कहने को तो स्थानीय नीति के लिए हेमंत सरकार की कोशिश भी उबलब्धियों में दर्ज है, लेकिन राज्यपाल से स्वीकृति मिलने तक इसका इंतजार करना चाहिए। हां, यह जरूर कहा जा सकता है कि हेमंत ने अपनी ओर से 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
हेमंत पर लगा पद का दुरुपयोग कर पट्टा लेने का आरोप
बीजेपी ने हेमंत सोरेन पर बड़ा आरोप लगाया कि सीए रहते उन्होंने अपने और परिजनों के नाम खनन पट्टा लिया। बीजेपी ने राज्यपाल से शिकायत की। राज्यपाल ने इसकी गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग से मंतव्य मांगा। चुनाव आयोग ने अपनी राय भी राजभवन को बता दी थी। इसकी पुष्टि खुद तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने की थी। तत्कालीन राज्यपाल ने यह कह कर भी हंगामा खड़ा कर दिया था कि जल्दी ही झारखंड में एटम बम फटेगा। चूंकि भाजपा ने पद के दुरुपयोग के आधार पर हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी, इसलिए माना जा रहा था कि हेमंत की कुर्सी पक्की छिनने वाली है। रमैस बैस विदा हो गए। नए राज्यपाल आ गए, पर आज तक चुनाव आयोग के पत्र का मजमून किसी को देखने-पढ़ने या सुनने को नहीं मिला। हेमंत सोरेन में इसे लेकर भय का आलम यह था कि उन्होंने बिना जरूरत अपने समर्थक विधायकों के साथ छत्तीसगढ़ का पर्यटन किया और लौटते ही विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर विश्वासमत हासिल कर लिया।
खनन घोटाले और जमीन घोटाले तक बदनाम हुए हेमंत
हेमंत सोरेन 1000 करोड़ के खनन घोटाले और सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री मामले में बदनामी से नहीं बच पाए। इसलिए कि इनमें शामिल लोगों के तार कहीं न कहीं घोटाले के आरोपियों से जुड़ता रहा। संताल परगना में पत्थर खनन और परिवहन घोटाले में हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र पकड़े गए तो हेमंत के प्रेस सलाहकार का भी नाम उछला। सत्ता के दलाल प्रेम प्रकाश भी पकड़े गए। उनके घर से तो हेमंत सोरेन की सुरक्षा में तैनात जवानों के हथियार बरामद होने से विपक्ष को दोनों के बीच सांठ-गांठ का आरोप लगाने का मौका मिल गया। मनरेगा घोटाले में आईएएस पूजा सिंघल, जमीन घोटाले में आईएएस छविरंजन और टेंडर घोटाले में चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी ने हेमंत सोरेन सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।



