ओवैसी ने भी राजस्थान चुनावों में ठोंकी ताल, कहां-कहां उतारे उम्मीदवार जानिए
राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट आ रही। इस बीच असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी राज्य में ताल ठोकते हुए अपने तीन उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। ओवैसी काफी समय से राजस्थान की राजनीति में एंट्री के लिए सक्रिय नजर आ रहे थे। उन्होंने राजस्थान में अपनी सभाओं के दौरान संकेत दिए कि इस बार राजस्थान विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी भी अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों पर हमला करते हुए खुद की पार्टी को दूसरे मोर्चे के रूप में विकल्प बताया है।

तीन सीटों पर उतारे कैंडिडेट
असदुद्दीन ओवैसी काफी समय से राजस्थान में सक्रिय नजर आ रहे थे। तब से यही माना जा रहा था कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी की भी भागीदारी देखने को मिलेगी। इसको लेकर उन्होंने टोंक समेत कई क्षेत्रों में अपनी चुनावी सभा भी की थी। इस दौरान शनिवार को बीजेपी और कांग्रेस की उम्मीदवारों की लिस्ट आने के बाद उन्होंने भी तीन उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें जयपुर के हवा महल सीट से जमील खान, सीकर के फतेहपुर से जावेद खान और भरतपुर के कांमा से इमरान नवाब को उम्मीदवार बनाया है।
ओवैसी बोले- और नाम आएंगे सामने
राजस्थान में पहली बार चुनाव लड़ रही ओवैसी की पार्टी 30- 40 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की बात कर कह रही। इसी को देखते हुए उन्होंने तीन विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि अन्य विधानसभा सीटों पर नामों के चयन को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। इसके बाद दूसरी सीटों पर भी उम्मीदवारों की जल्द ही घोषणा की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
पायलट के ‘गढ़’ टोंक पर नजर
ओवैसी की नजर टोंक विधानसभा सीट पर है, जो सचिन पायलट का गढ़ है। इसकी वजह टोंक विधानसभा मुस्लिम बाहुल्य सीट है। जहां करीब 60 हजार मतदाता मुस्लिम वर्ग के हैं। ऐसे में ओवैसी मुस्लिम समाज के वोटर्स को देखते हुए उन्होंने अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने की बात कही है। अगर ओवैसी की पार्टी से उम्मीदवार उतारा जाता है तो चुनाव में पायलट के मुस्लिम वोट बैंक में भी सेंध लग सकती है। इस बीच ओवैसी ने टोंक में बीते दिनों अपनी चुनावी सभा के दौरान सचिन पायलट पर जमकर हमला किया और उन्हें कोई दूसरा गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र संभालने की नसीहत भी दी।



