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जाति जनगणना पर राहुल से बिल्कुल उलट सोचते थे पिता राजीव गांधी, संसद में वीपी सिंह से हुई थी तीखी बहस

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बिहार सरकार ने जाति जनगणना की रिपोर्ट जारी कर बड़ा दांव खेल दिया है। सरकार के समर्थक इसे मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। मांग है कि बिहार की तर्ज पर पूरे देश में जाति को लेकर पूरी रिपोर्ट पेश की जाए। नीतीश-तेजस्वी समर्थक गदगद हैं। उन्हें पता है कि चुनाव से पहले उनका ये दांव काम कर जाएगा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी जातीय जनगणना की मांग की है और ‘जितनी आबादी, उतना हक’ का नारा दिया है। लेकिन उनके पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ऐसा नहीं सोचते थे। उन्होंने अपने समय में जाति के बिना वाले समाज की वकालक की थी।

राजीव ने तो अपने सरकार में मंत्री रहे पूर्व पीएम वीपी सिंह को भी मंडल आयोग की रिपोर्ट का विरोध किया था। राजीव गांधी को लगता था कि पीएम रहते वीपी सिंह की सरकार में लाई गई यह रिपोर्ट देश को जाति की लड़ाई में ले जाने के बराबर है। संसद के इतिहास में जाएंगे तो पाएंगे कि राजीव गांधी और वीपी सिंह के बीच लोकसभा में इसे लेकर तीखी बहस भी हुई थी। आज बात जाति को लेकर राजीव गांधी के उस भाषण की करेंगे और बताएंगे कि क्यों बेटे राहुल की सोच से अलग थी राजीव गांधी की सोच। न्यूज18 की रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से बताया गया है।

जाति पर राहुल से अलग सोच रखते थे राजीवराहुल गांधी की ‘जितनी आबादी, उतना हक’ का नारा उनके 1990 के दशक की मंडल राजनीति के दूसरे चैप्टर की ओर रुख करता दिखता है। हालांकि जाति आधारित मुद्दों पर कांग्रेस का दृष्टिकोण अलग-अलग रहा है। राहुल जाति जनगणना क मांग का सीधा मतलब है 2024 में पीएम मोदी से सीधा मुकाबला। लेकिन उनके पिता राजीव और उससे पहले दादी इंदिरा गांधी ने साल 1980 में ‘ना जात पर, ना पात पर का’ नारा दिया था।

वीपी सिंह और राजीव गांधी के बीच नोकझोंक
मंडल आयोग की रिपोर्ट को लेकर विपक्ष के तत्कालीन नेता राजीव गांधी और वीपी सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। राजीव गांधी ने कहा, ‘यह बेहद दुखद है कि इस सरकार की सोच जाति के इर्द-गिर्द घूमती है। वीपी सिंह हमारे समाज में दरार पैदा कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य एक जातिविहीन समाज होना चाहिए और किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहिए जो देश को जाति-आधारित समाज की ओर ले जाए। उन्होंने कहा, ‘इस सदन में कोई नहीं कहेगा कि जातिवाद का उन्मूलन उस राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा नहीं है। राजीव गांधी ने लोकसभा में कहा, ‘जिस तरह से आपने मंडल आयोग को लागू किया है, मेरे लिए, यह मेरे देश को तोड़ रहा है। इस देर घड़ी में भी, देश को इस जातिगत विभाजन से वापस लाने का समय है।’ उन्होंने कहा कि वीपी सिंह सरकार जातिवाद में निहित स्वार्थ पैदा कर रही है और देश को इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

हमें समस्या की जड़ को देखना होगा…
राजीव गांधी ने यह भी पूछा कि सरकार जाति को एकमात्र पहचानकर्ता के रूप में क्यों स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछड़ेपन और गरीबी को दूर करने के लिए, हमें समस्या की जड़ को देखना होगा और समान अवसर देना होगा। उन्होंने कहा, ‘हम, कांग्रेस, पिछड़ी जातियों के लिए एक व्यापक कार्य योजना, एक सकारात्मक कार्रवाई योजना के पक्ष में हैं। हमें इसकी जरूरत है। राजनीति करके या सीमित राजनीतिक रूप से प्रेरित जोड़तोड़ करके समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।’ उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि इस देश में जाति का बहुत महत्व है। लेकिन हमारा लक्ष्य क्या है? क्या हमारा लक्ष्य एक जातिविहीन समाज है?’

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