जिसने भोले-भाले लोगों से क्रिप्टो करेंसी के नाम पर 2.52 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस की बढ़ती सतर्कता और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। यह गिरोह विदेशों से बैठकर भारत में आर्थिक अपराधों को अंजाम दे रहा था।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को अच्छा कमीशन देने का लालच देता था और उन्हें अपने बैंक खाते खोलने के लिए राजी करता था। गिरोह आधार कार्ड का उपयोग करके ये खाते खुलवाता था, जिनमें धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि जमा की जाती थी। इसके बाद, इस अवैध धन को तुरंत क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया जाता था और कंबोडिया जैसे विदेशी स्थानों पर भेजा जाता था। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत थी, जिससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अज्ञात स्रोतों से आने वाले कमीशन के लालच में आकर अपने बैंक खाते या व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज़ (Aadhaar Card) किसी को न दें। इस सफलता ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिप्टो-आधारित घोटालों पर नकेल कसने के लिए साइबर सुरक्षा और जाँच एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता को उजागर किया है।


