पश्चिमी देशों का ‘डार्लिंग भारत, पूरब से हमेशा रहता है युद्ध के लिए तैयार…पाकिस्तानी मंत्री हिना रब्बानी ने उगला जहर
पाकिस्तान की मंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। एक कार्यक्रम में हिना ने भारत को लेकर जो कुछ भी कहा है उस पर कई विशेषज्ञों ने आपत्ति दर्ज कराई है। हिना की टिप्पणी को कुछ लोग विवादित करार दे रहे हैं। हिना रब्बानी ने भारत को ‘पश्चिमी देशों का डार्लिंग’ करार दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि जब बात पूरब की होती है तो उसका रवैया हमेशा लड़ाकू या युद्ध के लिए तैयार रहने वाला होता है। हिना ने इसी तरह का बयान एक महीने पहले भी दिया था। हिना, पाकिस्तान की उप विदेश मंत्री हैं और काफी समय से अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में हैं।
चीन की तारीफ, भारत का विरोध
हिना ने कहा, ‘अगर उत्तर की बात करें तो पाकिस्तान काफी अच्छा कर रहा है। चीन के साथ पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते हैं और उसके साथ आर्थिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। मगर अब सबकुछ बदल रहा है कुछ लोग अलग हो रहे हैं, कुछ जोखिम उठा रहे हैं। ऐसे में अब दुनिया की राजनीति भी काफी बदल रही है। उत्तर की तरफ से कुछ रुकावटें हैं लेकिन उनके साथ लगातार बातचीत हो रही है और संपर्क बना हुआ है।’इसके बाद हिना ने आगे कहा, ‘अब बात करते हैं भारत की जो पश्चिम का डार्लिंग बना हुआ है। जिसने पश्चिम का चहेता बनने का फैसला किया है। भारत वह देश है जिसने कुछ देशों के जो काफी खुला रवैया रखता है लेकिन उसी समय पूरब के लिए उसका रवैया युद्ध वाला रहता है।’विशेषज्ञों ने किया खारिज
कुछ विशेषज्ञों ने हिना के इस बयान को ‘खट्टे अंगूर’ कहकर खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि भारत सफल है क्योंकि भारतीय सफल होने की कोशिशें कर रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तानी अभी भी जेहाद और ईशनिंदा के खेल में बिजी है। जबकि पाकिस्तान की सरकार कठपुतली के तौर पर शासन करती है।
पहले भी दिया ऐसा बयान
हिना ने इसी तरह की टिप्पणी जून में भी की थी। उन्होंने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार के सवाल के जवाब में कहा था कि ‘युद्ध की मानसिकता रखने वाली सरकार के साथ कुछ भी करने की कोई गुंजाइश नहीं है। हिना ने 14 जून को पोलिटिको को दिए इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान संबंधों को बहाल करने के लिए किसी भी पुनरुद्धार के लिए तैयार है। लेकिन भारत में एक ऐसी सरकार है जिसकी वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने भारत की सरकार को भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच फूट डालने वाली सरकार कहा था। इसके बाद यह तय हो गया था कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अभी कुछ समय तक ठंडे ही रहने वाले हैं।



