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खुद की खोदी खाई में धंसता जा रहा चीन, आंकड़े तो यही बयां कर रहे, जानिए कहां गलती कर बैठे शी जिनपिंग

गरीब देशों को कर्ज देकर अपने जाल में फंसाने वाला चीन (China Economic Crisis) इन दिनों खुद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दुनिया की फैक्ट्री कहलाने वाले चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। चीन को ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसकी उम्मीद नहीं थी। बैंकों के बाहर बख्तरबंद गाड़ियां और हथियार लैस सेना के जवान, खंडहर होते मकान , रोजगार के लिए भटकते युवा…चीन की हालात बिगड़ती जा रही है। चीन का प्रॉपटी बाजार ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गया है। तीन सालों के सख्त कोविड लॉकडाउन ने उसकी अर्थव्यवस्था को खोखला कर दिया है । चीनी सरकार की जीरो-कोविड पॉलिसी और कमजोर ग्लोबल डिमांड के चलते इकॉनमी में जबरदस्त सुस्ती आ गई है। हालिया आकंड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मांग में गिरावट ने चीन की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला हैं।

अमेरिका के एक प्रमुख अखबार ने चीन की इकॉनमी को लेकर बड़ी बात कही। वर्ल्ड स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी चीन की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। चीन के 40 साल से जारी विकास का मॉडल अब बिखर चुका है। इतना ही नहीं अमेरिकी मीडिया ने लिखा की चीन की ये हालात छोटी अवधि की बजाय लंबे समय तक जारी रह सकती है। किसी भी देश की इकॉनमी को उसकी करेंसी की ताकत से समझ सकते हैं। चीनी करेंसी युआन सबसे ख़राब प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है।

खस्ताहाल चीन के हालात इन 6 बिन्दुओं से समझिए

1. चीन भारी डिफ्लेशन का शिकार है। कोविड के बाद से जहां दुनियाभर के देशों में महंगाई चरम पर है तो वहीं चीन में स्थिति विपरीत है। चीन में चीजों की कीमतें बढ़ने की बजाय सस्ती हो रही है। चीनी अर्थव्यवस्था डिफ्लेशन मोड में है। लोगों की खरीदने की क्षमता और डिमांड घटती जा रही है, जो अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

2. चीन में बेरोजगारी चरम पर है। यहां बेरोजगारी का स्तर 21 फीसदी तक पहुंच गया है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही है। स्थिति ऐसी है कि अब चीनी सरकार ने रोजगार से जुड़े आंकड़े जारी करने बंद कर दिए हैं।

3. चीन का रियल एस्टेट उसकी इकॉनमी की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कोविड के बाद से वहां रियल एस्टेट की हालत खराब हो चुकी है। घर खरीदारों के अभाव में रियल एस्टेट कंपनियों के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। घर बिक नहीं रहे हैं और कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। चीन ने तेज विकास के लिए रियल एस्टेट में निवेश तो कर लिया, लेकिन अब खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि चीन के कई शहर तो घोस्ट शहर ( भूतिया शहर) बन चुकी हैं।

4. चीनी मुद्रा युआन पिछले 16 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बीते एक साल में डॉलर के मुकाबले युआन 7 फीसदी टूट चुकी है। स्थिति ऐसी बनी कि चीन के लोगों ने हांगकांग में निवेश बढ़ा रहे हैं।

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