सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: झारखंड हाई कोर्ट के रवैये पर जताई नाराज़गी, लंबित मामलों पर सभी हाई कोर्ट से मांगी रिपोर्ट |
शीर्ष अदालत ने फैसलों में देरी को बताया चिंताजनक, कहा – न्याय में देरी न्याय से इनकार के बराबर
देश की सबसे बड़ी अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी नाराज़गी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत परेशान करने वाली है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही न केवल न्याय प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता का भरोसा भी डगमगा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे सभी मामलों की एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करें, जिनमें लंबे समय से फैसला लंबित है। कोर्ट ने कहा कि देरी के कारणों की भी स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि यह आकलन किया जा सके कि यह प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा है या न्यायिक उपेक्षा का।
अदालत ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि फैसलों में अनावश्यक देरी से न केवल नागरिकों को न्याय मिलने में बाधा आती है, बल्कि यह मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्हें नुकसान पहुंचाता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने” के समान है।
विशेष रूप से झारखंड हाई कोर्ट को लेकर शीर्ष अदालत की नाराज़गी यह दर्शाती है कि न्याय प्रणाली में समयबद्धता को लेकर कितनी गंभीरता है। कोर्ट ने चेताया कि यदि न्यायिक प्रणाली में जवाबदेही नहीं होगी तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी।
इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें हाई कोर्टों पर हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद अपनी कार्यप्रणाली में कितना सुधार लाते हैं। उम्मीद है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज़ और प्रभावी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


