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BRICS बैठक में भारत ने जलवायु न्याय और फंडिंग पर उठाई मजबूत आवाज.

नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को ब्राजीलिया में हुई BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में विकासशील देशों के लिए पर्याप्त जलवायु वित्त और तकनीकी सहयोग की मांग की।

भारत ने कहा कि विकसित देशों की फंडिंग विफलता से विकासशील देश जलवायु लक्ष्यों को नहीं पा सकेंगे।

मुख्य बातें:

  1. भारत ने BRICS बैठक में जलवायु न्याय की पुरजोर वकालत की।

  2. भारत ने कहा कि सालाना $300 अरब का प्रस्तावित फंड पर्याप्त नहीं है

  3. विकासशील देशों को चाहिए $1.3 ट्रिलियन सालाना जलवायु फंड।

  4. भारत ने COP30 सम्मेलन को निर्णायक मौका बताया।

  5. COP30 की मेज़बानी इस साल ब्राजील करेगा।

  6. भारत ने जलवायु अनुकूलन और लचीलापन पर जोर दिया।

  7. UAE-Belem Adaptation Work Programme के सफल समापन की उम्मीद जताई।

  8. भारत ने वैश्विक कार्बन बजट के न्यायसंगत उपयोग की मांग की।

  9. BRICS को संयुक्त होकर जलवायु वार्ताओं को मजबूती देने की अपील।

  10. जलवायु मुद्दों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता बताई।

साझा जिम्मेदारियां और संसाधन:

  1. भारत ने BRICS में हुए विस्तार को वैश्विक असर का प्रतीक बताया।

  2. BRICS देशों के पास 54% तेल उत्पादन और 53% गैस भंडार हैं।

  3. 40% कोयले का भंडार भी BRICS के पास है।

  4. रणनीतिक धातुओं और खनिजों पर BRICS का नियंत्रण महत्वपूर्ण।

  5. BRICS देश 36% वैश्विक GDP का योगदान करते हैं।

  6. 2050 तक ऊर्जा संक्रमण में BRICS की भूमिका निर्णायक होगी।

  7. भारत ने वैज्ञानिक विशेषज्ञता को साझा समाधान में बदलने की बात कही।

  8. वनों की कटाई, जल प्रदूषण और जैव विविधता संकट जैसे साझा मुद्दों को रेखांकित किया।

  9. भारत ने कहा, “जलवायु फंडिंग बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति के अधूरी है।”

  10. BRICS को बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज बनना चाहिए।

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