भारत ने कहा कि विकसित देशों की फंडिंग विफलता से विकासशील देश जलवायु लक्ष्यों को नहीं पा सकेंगे।
मुख्य बातें:
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भारत ने BRICS बैठक में जलवायु न्याय की पुरजोर वकालत की।
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भारत ने कहा कि सालाना $300 अरब का प्रस्तावित फंड पर्याप्त नहीं है।
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विकासशील देशों को चाहिए $1.3 ट्रिलियन सालाना जलवायु फंड।
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भारत ने COP30 सम्मेलन को निर्णायक मौका बताया।
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COP30 की मेज़बानी इस साल ब्राजील करेगा।
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भारत ने जलवायु अनुकूलन और लचीलापन पर जोर दिया।
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UAE-Belem Adaptation Work Programme के सफल समापन की उम्मीद जताई।
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भारत ने वैश्विक कार्बन बजट के न्यायसंगत उपयोग की मांग की।
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BRICS को संयुक्त होकर जलवायु वार्ताओं को मजबूती देने की अपील।
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जलवायु मुद्दों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता बताई।
साझा जिम्मेदारियां और संसाधन:
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भारत ने BRICS में हुए विस्तार को वैश्विक असर का प्रतीक बताया।
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BRICS देशों के पास 54% तेल उत्पादन और 53% गैस भंडार हैं।
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40% कोयले का भंडार भी BRICS के पास है।
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रणनीतिक धातुओं और खनिजों पर BRICS का नियंत्रण महत्वपूर्ण।
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BRICS देश 36% वैश्विक GDP का योगदान करते हैं।
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2050 तक ऊर्जा संक्रमण में BRICS की भूमिका निर्णायक होगी।
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भारत ने वैज्ञानिक विशेषज्ञता को साझा समाधान में बदलने की बात कही।
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वनों की कटाई, जल प्रदूषण और जैव विविधता संकट जैसे साझा मुद्दों को रेखांकित किया।
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भारत ने कहा, “जलवायु फंडिंग बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति के अधूरी है।”
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BRICS को बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज बनना चाहिए।



