छठ पूजा का दूसरा दिन: खरना का महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त
छठ पूजा का दूसरा दिन, खरना, व्रतधारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इस दिन व्रती अपना उपवास तोड़ते हैं और विशेष प्रसाद का सेवन करते हैं। खरना का धार्मिक महत्व और इसकी विधियों के बारे में जानना जरूरी है।
खरना का महत्व
खरना छठ पूजा का एक प्रमुख अंग है। इस दिन व्रती, जो पहले दिन से निर्जला व्रत रखते हैं, वे खीर और पुआ का सेवन करके अपना व्रत तोड़ते हैं। माना जाता है कि खीर और पुआ सूर्य देव को प्रिय हैं। खरना के दिन सूर्यास्त के समय व्रती खीर और पुआ का प्रसाद चढ़ाते हैं और फिर स्वयं भी इसका सेवन करते हैं।
खरना की विधि
खरना की विधि काफी सरल होती है। इस दिन व्रती सबसे पहले स्नान करते हैं और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं। इसके बाद वे खीर और पुआ बनाते हैं। सूर्यास्त के समय वे खीर और पुआ को एक थाली में सजाते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद वे स्वयं भी इस प्रसाद का सेवन करते हैं।
शुभ मुहूर्त
खरना का शुभ मुहूर्त सूर्यास्त के समय होता है। इस दिन व्रती को सूर्यास्त के समय ही खीर और पुआ का सेवन करना चाहिए।
क्यों है खरना महत्वपूर्ण?
खरना छठ पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह व्रती को शक्ति देता है और उन्हें अगले दिन के लिए तैयार करता है।
मुख्य बिंदु:
खरना छठ पूजा का दूसरा दिन है।
इस दिन व्रती खीर और पुआ का सेवन करते हैं।
खरना सूर्यास्त के समय किया जाता है।
खरना व्रती को शक्ति देता है और उन्हें अगले दिन के लिए तैयार करता है।


