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बसपा से कांग्रेस में आए 4 विधायकों ने की बैठक तो गहलोत सरकार में मची खलबली, जाने क्या खिचड़ी पक रही

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में आए दिन कुछ न कुछ घटनाएं ऐसी होती रही है जिससे पूरी पार्टी में खलबली मच जाती है। बीते तीन साल तक सचिन पायलट और उनके समर्थकों की ओर से सरकार के खिलाफ उठाए गए कदम से सरकार संकट में आ गई थी। बाद में गहलोत समर्थक कुछ विधायक भी उनके खिलाफ बयानबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष के विधायक अपनी ही सरकार के मंत्रियों को खुलेआम भ्रष्ट बताते रहे। पार्टी विरोधी बयान देने पर मुख्यमंत्री ने अपने मंत्री मंडल से एक मंत्री राजेन्द्र गुढा को बर्खास्त किया। अब बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए चार विधायकों ने भरतपुर के सर्किट हाउस में आपात बैठक की। इस बैठक ने एक बार फिर कांग्रेस में खलबली मचा दी।

बसपा से आए विधायकों ने बचाई थी सरकार

साढे तीन साल पहले जब सरकार पर संकट आया। उससे ठीक पहले बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। निर्दलीय विधायकों ने भी गहलोत को समर्थन दिया। ऐसे में गहलोत सरकार गिरने से बच गई थी। बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों में से एक राजेन्द्र गुढा भी हैं जो इन विधायक दल के नेता भी थे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने अपने मंत्री मंडल से राजेन्द्र गुढा को बर्खास्त कर दिया। हालांकि बसपा से शेष 5 विधायकों ने मुख्यमंत्री निवास पर सीएम गहलोत से मुलाकात की लेकिन मंगलवार 1 अगस्त को भरतपुर सर्किट हाउस में 4 विधायकों ने आपात बैठक बुलाई। इस बैठक को लेकर सरकार के कान खड़े हो गए।

अपने नेता पर कार्रवाई सहन करेंगे विधायक ?

बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों में राजेन्द्र सिंह गुढा, जोगिन्दर सिंह अवाना, लाखन मीणा, संदीप यादव, दीपचंद खेरिया और वाजिब अली हैं। राजेन्द्र गुढा को मंत्री मंडल से बर्खास्त करने के बाद जोगेन्द्र सिंह अवाना, लाखन मीणा, संदीप यादव और वाजिब अली ने अचानक बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि क्या ये विधायक अपने नेता पर हुई कार्रवाई को सहन करेंगे या उनके समर्थन में सरकार के खिलाफ कदम उठाएंगे। अगर इन विधायकों ने अपने नेता यानी राजेन्द्र गुढा का साथ दिया तो कांग्रेस को नुकसान होना तय है।

आगामी चुनाव में टिकट को लेकर मंथन

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में जिन जिन सीटों पर बसपा और निर्दलीय विधायक चुनाव जीते थे। उन 19 सीटों के कांग्रेस प्रत्याशी अपनी ही पार्टी की सरकार से नाराज हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी रहे इन नेताओं का कहना है कि जिन विधायकों ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को हराया, सरकार ने उन्हीं को गले लगा लिया। आगामी चुनाव को लेकर अब टिकटों पर संशय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीयों और बसपा साथ छोड़ कर कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं को टिकट देगी या अपनी पार्टी के प्रत्याशी रहे नेताओं पर भरोसा जताएगी। बसपा से आए विधायक भी अपनी अपनी सीट पर कांग्रेस से टिकट पाने की कोशिश में है। अगर पार्टी उन्हें इग्नोर करती है तो फिर वे कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतरने को तैयार होंगे। यही चिंता कांग्रेस को सता रही है।

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