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खालिस्तान के चक्कर में अपनी ही नैया न डूबा दें ट्रूडो, जानिए भारत के मुकाबले कितना पीछे है कनाडा

खालिस्तान के मुद्दे पर भारत और कनाडा के बीच संबंध बिगड़ते जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ रही तल्खी कम होने होने के बजाए बीतते दिन के साथ बढ़ रही है। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगाया, जिसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया। ट्रुडो के इस बयान क बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ रहा है। अगर इसका असर कारोबार पर पड़ा तो दोनों देशों की इकॉनमी पर इसका असर पड़ेगा।

​कनाडा Vs भारत की इकॉनमी

​कनाडा Vs भारत की इकॉनमी

कनाडा की इकॉनमी पर नजर डालें तो ये दुनिया की टॉप 10 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। आईएमएफ की वर्ल्ड इकॉनमी रैंकिंग 2023 की लिस्ट के मुताबिक कनाडा 2.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की नौंवी सबसे बड़ी इकॉनमी है। कनाडा की प्रति व्यक्ति आय 46,260.71 डॉलर है। कनाडा की इकॉनमी फिशिंग, प्राकृतिक संसाधन के दोहन और निर्यात पर टिकी है। अब बात भारत की करते हैं। भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। दुनियाभर के देश ने इस बात का लोहा माना है कि भारत की इकॉनमी तेज रफ्तार से भाग रही है। आईएमएफ की वर्ल्ड इकॉनमी रैंकिंग 2023 के मुताबिक भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकॉनमी बना हुआ है। भारत 3.469 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर है और तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार ने इसे 5वें से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनाने का लक्ष्य रखा है। यानी इकॉनमी के मामले में कनाडा भारत के काफी पीछे है।

भारत-कनाडा के बीच कारोबार​

​भारत-कनाडा के बीच कारोबार​

कनाडाई पीएम ट्रूडो के बयान के बाद भारत और कनाडा के बीच ट्रेड डील अटकता हुआ दिख रहा है। जहां उम्मीद थी कि साल 2023 के अंत तक दोनों देशों के बीच व्यापारिक डील पूरी हो जाएगी, वहां अब ट्रूडो के बयान ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। हालांकि इसमें नुकसान उनका ही है। भारत-कनाडा के बीच ट्रेड डील रुकने से कनाडा को ज्यादा नुकसान है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस व्यापार समझौते से भारत को होने वाले फायदे सीमित है।

​कनाडा की इस कंपनी के 1.74 लाख करोड़ दांव पर​

​कनाडा की इस कंपनी के 1.74 लाख करोड़ दांव पर​

कनाडा की सबसे बड़ी पेंशन फंड ने अकेले भारत में 1.74 लाख करोड़ का निवेश किया है। कंपनी ने ये निवेश लॉग टर्म को ध्यान में रखकर किया है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच प्रतिबंधों का ऐलान होता है तो कनाडा की मुश्किल बढ़ेगी। कनेडियन पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने भारत की कई कंपनियों में निवेश किया है। कोटक महिंद्रा, पेटीएम, जोमैटो, आईसीआईसीआई जैसी कंपनियों में इसका निवेश शामिल है। कनाडा पेंशन फंड ने कोटक महिंद्रा में 9600 करोड़, जोमैटो में 2078 करोड़, पेटीएम में 1.76 करोड़, नाइका में 625 करोड़ रुपये निवेश किया है। अगर दोनों देशों के बीच प्रतिबंध बढ़े तो इन कंपनियों की मुश्किल बढ़ेगी। वहीं कनाडा पेंशन फंड का निवेश प्रभावित होगा।

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