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भारत के एस्ट्रोसैट और नासा की अंतरिक्ष वेधशालाओं ने मिलकर ब्लैक होल के रहस्य को सुलझाया.

नई दिल्ली: भारत के स्वदेशी उपग्रह एस्ट्रोसैट और नासा की अंतरिक्ष वेधशालाओं ने मिलकर ब्लैक होल के रहस्यों को उजागर करने में एक बड़ी सफलता हासिल की है।

वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में पाया है कि तारों के टूटने की घटनाएं (टाइडल डिसरप्शन इवेंट्स) और ब्लैक होल के बीच एक गहरा संबंध है।

इस अध्ययन में, एस्ट्रोसैट और नासा की वेधशालाओं ने मिलकर एक तारे के टूटने की घटना को देखा। जब एक तारा किसी ब्लैक होल के बहुत करीब जाता है, तो ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल तारे को खींचकर फाड़ देता है। इस घटना को टाइडल डिसरप्शन इवेंट कहते हैं।

इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के बारे में कई नई जानकारियां मिली हैं। इससे हमें ब्लैक होल के निर्माण, विकास और उनके आसपास के वातावरण के बारे में बेहतर समझने में मदद मिलेगी।

यह अध्ययन खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे हमें ब्रह्मांड के बारे में और अधिक जानने में मदद मिलेगी।

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