गुमला : झांगुर गिरोह के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह का सुप्रीमो रामदेव उरांव पुलिस से लगातार संपर्क में है। उसके साथ गिरोह के दो बड़े उग्रवादी भी बातचीत में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण को लेकर सभी बातें लगभग तय कर ली गई हैं। पुलिस रांची जोनल आईजी की मौजूदगी में इनके आत्मसमर्पण की तैयारी कर रही है। यह खबर मिलने के बाद क्षेत्र में उत्साह और सुरक्षा का वातावरण दिख रहा है। ग्रामीणों ने इस कदम को सकारात्मक बताया है। पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। यह कदम क्षेत्र में उग्रवाद पर बड़ी चोट माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार अभियान पहले की तरह जारी रहेगा। इसे शांति बहाली के लिए बड़ा बदलाव बताया जा रहा है। पुलिस आगे की योजना भी तैयार कर रही है। गिरोह की गतिविधियों की पूरी जांच की जाएगी।
झांगुर गिरोह वर्ष 2002 से झारखंड के गुमला और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहा है। इस गिरोह ने दो दशक से अधिक समय तक ग्रामीण इलाकों में दहशत फैलाई। गिरोह के नाम हत्या, अपहरण, लूट और आगजनी जैसे अपराध दर्ज हैं। सुप्रीमो रामदेव उरांव अकेले 27 मामलों में वांछित है। जनवरी 2025 में घाघरा के देवरागानी में पुलिस मुठभेड़ के बाद वह फरार हो गया था। तब से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। इस गिरोह में 13 सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में सभी के नाम और अपराध दर्ज हैं। पुलिस का मानना है कि आत्मसमर्पण से क्षेत्र में शांति और विश्वास लौटेगा। ग्रामीण भी सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शासन इसे बड़ी सफलता मान रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद सभी उग्रवादियों को कानून के अनुसार मौका दिया जाएगा। पुनर्वास योजना के तहत उन्हें सरकारी लाभ भी मिल सकता है। यह कार्यक्रम सरकार की उग्रवाद विरोधी नीति के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस की ओर से कहा गया है कि आगे ऐसे अभियान और तेज होंगे। जिले के अधिकारियों ने अपील की है कि बाकी उग्रवादी भी समाज की मुख्य धारा में लौटें। सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में चौकसी बढ़ा दी है। पुलिस ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है। प्रशासन का लक्ष्य है कि क्षेत्र से उग्रवाद पूरी तरह समाप्त हो। यह घटना आने वाले समय में राज्य के लिए प्रेरक साबित हो सकती है। जिले में अब शांति की उम्मीद बढ़ी है।


