Uncategorized

अतीक का ‘शेर’ असद अहमद मिट्टी में कैसे मिल गया, जानें एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली : दोपहर के करीब 11 बजे थे, धूप भी काफी तेज थी। प्रयागराज कोर्ट में माफिया से नेता बने अतीक अहमद की पेशी का होने वाली थी। अदालत के बाहर से लेकर भीतर तक काफी गहमागहमी थी। वकीलों से लोगों की भीड़ परिसर में मौजूद थी। लोगों के हुजूम के बीच जैसे ही अतीक अदालत पहुंचा वहां मौजूद भीड़ ने उसे गालियां देना शुरू कर दिया। अतीक की बेइज्जती करने वालों में आम लोग से लेकर अदालत परिसर में मौजूद वकील भी शामिल थे। कोर्ट में पहली सुनवाई सुबह 11.25 बजे से शुरू होकर 12 बजे तक चली। एक तरफ अतीक कोर्ट में अपने भाई असद के साथ कोर्ट में मौजूद था तो दूसरी तरफ उसे जिदंगी का सबसे बड़ा सदमा लगने वाला था। असद अहमद जिसे अतीक अपना ‘शेर’ बच्चा कहता था उसकी अंतिम घड़ी करीब थी।

जब दिल्ली में हाथ आते-आते रह गया था असद

प्रयागराज से करीब 400 किलोमीटर दूर झांसी में यूपी एसटीएफ को उमेश पाल मर्डर केस में बड़ा सुराग हाथ लग चुका था। उमेश पाल मर्डर केस में 47 दिन से फरार चल रहे अतीक के बेटे असद को लेकर एसटीएफ को महत्वपूर्ण जानकारी मिली। एक मुखबिर ने बताया कि असद और गुलाम को कस्बा चिरागांव, जनपद झांसी में देखा गया है। संभव है कि ये लोग अभी भी वहीं छुपे हों। दरअसल उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम देने के बाद कौशांबी से नोएडा होते हुए दिल्ली पहुंच गए थे। दिल्ली में लोकेशन ट्रेस होने के बाद यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट को इन्हें पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, जब तक एसटीएफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की मदद से जब तक संगम विहार पहुंचती तब तक ये लोग वहां से बस के जरिये अजमेर के लिए निकल गए थे।

कच्चे रास्ते पर फिसली असद की बाइक

लगातार असद और गुलाम के पीछे लगी एसटीएफ को जब बुधवार रात को इनके झांसी में दिखाई देने की खबर मिली तो टीम किसी भी कीमत पर इन्हें पकड़ने का मौका नहीं गंवाना चाहती थी। ये लोग मध्य प्रदेश के रास्ते झांसी पहुंच थे। झांसी से 30 किलोमीटर दूर परीछा डैम के पास छिपे हुए थे। इस दौरान एसटीएफ की 12 लोगों की टीम ने इन्हें घेर लिया। टीम में दो डिप्टी एसपी, दो इंस्पेक्टर के अलावा दो कमांडो भी शामिल थे। असद और गुलाम मोटरसाइकिल पर सवार होकर भागने की फिराक में थे। एसटीएफ ने असद और गुलाम का पीछा किया। कच्चे रास्ते पर पहुंचते ही उनकी बाइक फिसल गई। वह, वहीं, एक गड्ढे में गिर गए। यूपी एसटीएफ की एफआईआर के अनुसार एसटीएफ ने इन्हें सरेंडर करने के लिए कहा। बाइक से गिरने के बाद ही इन दोनों ने विदेशी पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी कार्रवाई में असद अहमद ढेर हो गया। खास बात रही की पूरे एनकाउंटर को लेकर झांसी पुलिस को भनक तक नहीं लगी। एसटीएफ ने एनकाउंटर के बाद लोकल पुलिस को इसकी जानकारी दी।

ऐसे रास्ते पर भागे जहां से मंजिल नहीं मौत मिली

रिपोर्ट के अनुसार एसटीएफ ने जब असद और गुलाम को घेरा तब उन लोगों ने अपनी बाइक को पारीछा डैम की मुख्य सड़क की बचाए कच्ची सड़क की तरफ उतार लिया। खास बात यह है कि यह उबड़-खाबड़ रास्ता आगे जाकर बंद हो जाता है। रास्ते में आगे एक दीवार बनी हुई है। दीवार के दूसरी तरफ सिंचाई विभाग के कर्मचारी का आवास बना हुआ है। यहां पर गांव की तरफ जाने के लिए महज एक पगड़डी जैसा रास्ता है। यह रास्ता सिर्फ यहां के स्थानीय लोगों को ही पता है। इसके दोनों तरफ कंटीले पेड़ थे। ऐसे में दोनों ने पुलिस से बचने के लिए जो रास्ता चुना वह किसी मंजिल की तरफ नहीं बल्कि उनकी मौत की तरफ लेकर गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button