यह समझौता लगभग चार दशकों बाद भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका के बीच 5 अप्रैल को बैठक के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुद्रा अदला-बदली (Currency Swap) और कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring) जैसे महत्वपूर्ण समझौतों पर भी चर्चा होगी।
भारत, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच त्रिंकोमाली तेल भंडारण फर्म के संयुक्त विकास को लेकर भी सहमति बनने की उम्मीद है।
पीएम मोदी 4 अप्रैल को थाईलैंड की यात्रा समाप्त करने के बाद श्रीलंका पहुंचेंगे और वहां तीन दिवसीय यात्रा पर रहेंगे।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शुक्रवार को बताया कि रक्षा सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की तैयारी हो चुकी है।
यह रक्षा समझौता भारत-श्रीलंका के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों का प्रतीक होगा।
यह समझौता ऐसे समय पर हो रहा है जब चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
2022 में चीन का मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैकिंग शिप ‘युआन वांग’ के हंबनटोटा बंदरगाह पर रुकने से भारत और श्रीलंका के बीच तनाव बढ़ा था।
मोदी की यात्रा के दौरान निवेश, ऊर्जा, डिजिटल संपर्क और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।
पीएम मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायका के मेजबानी में पहले विदेशी नेता होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली बार 2019 में श्रीलंका का दौरा किया था।
श्रीलंका ने हाल ही में भारत को आश्वासन दिया है कि उसकी भूमि का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा।
भारत ने 2022 के आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका को 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की थी।
मोदी अपनी यात्रा के दौरान मछुआरों के मुद्दे को भी श्रीलंकाई नेतृत्व के समक्ष उठाएंगे।
दोनों नेता संयुक्त रूप से संपूर सोलर ऊर्जा परियोजना का वर्चुअल शिलान्यास भी करेंगे।
मोदी और दिसानायका ऐतिहासिक अनुराधापुरा शहर में महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
भारत-श्रीलंका के बीच ऊर्जा संपर्क, स्वास्थ्य और डिजिटल सहयोग पर कई समझौतों का आदान-प्रदान होगा।
इस यात्रा को भारत-श्रीलंका संबंधों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।


