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संगमनेर: महाराष्ट्र के संगमनेर में एक वन रक्षक पिछले छह वर्षों से भीषण गर्मी के दौरान जंगली जानवरों की प्यास बुझाकर उनके लिए मसीहा बन गया है।

अपनी निस्वार्थ सेवा और वन्यजीवों के प्रति करुणा के चलते यह वनकर्मी क्षेत्र में प्रशंसा का पात्र बन गया है।

वन रक्षक, जिनकी पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, हर साल गर्मियों की शुरुआत के साथ ही जंगलों में सक्रिय हो जाते हैं। वे दूर-दराज के इलाकों में जाते हैं, जहां पानी के स्रोत सूख जाते हैं, और वहां कृत्रिम तालाब और कंटेनर बनाते हैं ताकि प्यासे जानवर पानी पी सकें।

यह वन रक्षक अकेले ही इस नेक काम को अंजाम देता है। वह अपने निजी संसाधनों और कभी-कभी स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पानी के टैंकरों को जंगलों तक पहुंचाता है। तपती धूप और मुश्किल रास्तों की परवाह किए बिना, वह यह सुनिश्चित करता है कि हर प्यासे जानवर तक पानी पहुंचे।

उनकी इस पहल से हिरण, तेंदुए, भालू और विभिन्न प्रकार के पक्षियों सहित कई जंगली जानवरों को भीषण गर्मी में जीवनदान मिला है। स्थानीय लोगों और अन्य वन अधिकारियों ने भी उनके इस समर्पण की सराहना की है।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस वन रक्षक के प्रयासों को असाधारण बताया है। उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति बिना किसी अपेक्षा के लगातार छह गर्मियों से वन्यजीवों की सेवा कर रहा है, जो वास्तव में प्रेरणादायक है।

उनकी कहानी वन्यजीव संरक्षण के महत्व और व्यक्तिगत स्तर पर किए गए प्रयासों के प्रभाव को दर्शाती है। यह वन रक्षक न केवल जानवरों की प्यास बुझा रहा है, बल्कि उनके जीवन को भी बचा रहा है, जिससे क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद मिल रही है।

उनकी इस मानवीय पहल को देखते हुए, कई वन्यजीव संगठन और पर्यावरणविद अब उन्हें और अधिक संसाधनों और समर्थन प्रदान करने के लिए आगे आ रहे हैं। उनका मानना है कि इस वन रक्षक का कार्य दूसरों के लिए भी एक उदाहरण है कि कैसे छोटे-छोटे प्रयास भी प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

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