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उन्होंने बताया कि कई प्रतिबंधित माओवादी संगठनों ने अब राज्य में अपना ठिकाना बना लिया है।
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ये संगठन अब शहरी इलाकों में अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।
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प्रस्तावित कानून केवल देशविरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों पर लागू होगा, आम नागरिकों की स्वतंत्रता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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फडणवीस ने यह बयान पत्रकार संगठनों के साथ बैठक के दौरान दिया।
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उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत करना है।
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प्रस्तावित कानून मानसून सत्र में 30 जून से विधानमंडल में पेश किया जाएगा।
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पत्रकार संगठनों ने कानून की कुछ धाराओं पर चिंता जताई है।
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फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि पत्रकारों की स्वतंत्रता को कोई खतरा नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार संगठन सुझाव देंगे तो कानून में संशोधन किया जा सकता है।
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कानून की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसे संयुक्त समिति द्वारा समीक्षा के लिए भेजा गया था।
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साथ ही इस पर सार्वजनिक सुनवाई भी की गई है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि चार अन्य राज्य और केंद्र सरकार पहले ही ऐसे कानून लागू कर चुके हैं।
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महाराष्ट्र का यह कानून अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सुरक्षात्मक होगा।
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फडणवीस ने कहा कि कानून लागू न करने की स्थिति में राज्य को सुरक्षा संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून का उद्देश्य सिर्फ देशविरोधी संगठनों की गतिविधियों पर लगाम लगाना है।
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कानून दिसंबर में शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था।
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फडणवीस ने दोहराया कि आम जनता की अभिव्यक्ति की आज़ादी सुरक्षित रहेगी।
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उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों को लेकर भ्रम दूर किया जाएगा।
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सरकार जन जागरूकता और संवाद के ज़रिये कानून को लागू करना चाहती है।


