नई दिल्ली: विमानन सुरक्षा और भेद्यता परीक्षण को बढ़ाने के उद्देश्य से एक अत्याधुनिक ब्लैक बॉक्स प्रयोगशाला का अनावरण किया गया है।
यह उन्नत प्रयोगशाला विमानन दुर्घटनाओं का विश्लेषण करने, क्षतिग्रस्त ब्लैक बॉक्स की मरम्मत करने, महत्वपूर्ण उड़ान डेटा को पुनर्प्राप्त करने और डिकोड करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह अत्याधुनिक सुविधा विशेष रूप से विमान दुर्घटनाओं और घटनाओं की गहन जांच करने के लिए डिज़ाइन की गई है। ब्लैक बॉक्स, जिसे फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) के रूप में भी जाना जाता है, विमान के प्रदर्शन और चालक दल की बातचीत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी संग्रहीत करते हैं। दुर्घटना की स्थिति में, यह डेटा दुर्घटना के कारणों को समझने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक होता है।
नई प्रयोगशाला में नवीनतम तकनीक और उपकरण मौजूद हैं जो क्षतिग्रस्त ब्लैक बॉक्स से डेटा को सुरक्षित रूप से निकालने और उसका विश्लेषण करने में मदद करते हैं। इसमें उच्च गति वाले डेटा रिकवरी सिस्टम, उन्नत ऑडियो और वीडियो विश्लेषण उपकरण, और डेटा को डिकोड और समझने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर शामिल हैं।
इस प्रयोगशाला की स्थापना से विमानन सुरक्षा जांचकर्ताओं को तेजी से और अधिक कुशलता से काम करने में मदद मिलेगी। पहले, क्षतिग्रस्त ब्लैक बॉक्स को अक्सर विदेशों में विशेष सुविधाओं में भेजना पड़ता था, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता था। अब, यह सुविधा देश में ही उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और समय पर सुरक्षा सिफारिशें जारी की जा सकेंगी।
यह प्रयोगशाला न केवल दुर्घटना जांच में मदद करेगी, बल्कि विमानन प्रणालियों की भेद्यता का परीक्षण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शोधकर्ता और इंजीनियर विमान के विभिन्न घटकों और प्रणालियों का अनुकरण कर सकते हैं ताकि संभावित कमजोरियों की पहचान की जा सके और उन्हें दूर करने के उपाय विकसित किए जा सकें।
इस पहल से भारतीय विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह प्रयोगशाला विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को भी बढ़ावा देगी, जिससे भविष्य में और भी उन्नत सुरक्षा तकनीकों का विकास हो सकेगा।


