लंदन: भारतीय मूल की ऑक्सफोर्ड की इतिहासकार मणिकर्णिका दत्ता को ब्रिटेन से निर्वासन का आदेश दिया गया है।
मणिकर्णिका दत्ता पिछले 12 वर्षों से लंदन में रह रही थीं।
यूके होम ऑफिस ने दत्ता को देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दत्ता पर आरोप है कि उन्होंने भारत में ज्यादा दिन बिताए।
ब्रिटेन के कानून के तहत, वीजा धारकों के लिए साल में सीमित दिनों तक ही विदेश में रहने की अनुमति होती है।
दत्ता ने दावा किया कि वह अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए भारत में ज्यादा दिन रहीं।
उनका कहना है कि उन्होंने यूके सरकार को इस बारे में सूचित भी किया था।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कई शिक्षाविदों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है।
दत्ता ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशियाई इतिहास की विशेषज्ञ हैं।
उनकी रिसर्च भारत-ब्रिटेन संबंधों और औपनिवेशिक इतिहास पर केंद्रित रही है।
इस मामले ने ब्रिटेन के आव्रजन नियमों को लेकर विवाद को जन्म दिया है।
शिक्षाविदों का कहना है कि मानवीय आधार पर दत्ता को राहत दी जानी चाहिए।
दत्ता ने कहा कि वह यूके में अपना शोध कार्य जारी रखना चाहती हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कई छात्रों ने उनके समर्थन में पत्र लिखा है।
ब्रिटिश मीडिया में इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
दत्ता का कहना है कि वह यूके में अपनी पहचान और योगदान साबित कर चुकी हैं।
कई शिक्षाविदों ने ब्रिटेन सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
दत्ता को भरोसा है कि न्याय प्रणाली उन्हें न्याय देगी।


