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‘वहां नौजवानों को डायबिटिक देखा’ MBA ग्रेजुएट ने नौकरी छोड़ शुरू की मिलेट कंपनी, अब करोड़ों कमाई!

सोमशेखर पोगुला की कहानी बेहद दिलचस्प है। यह कॉरपोरेट रोल से सफल उद्यमी में तब्‍दील होने से जुड़ी है। सोमशेखर अदिति मिलेट्स के फाउंडर हैं। इसे खड़ा करने में सोमशेखर ने कठिन यात्रा तय की है। ऐसी कई पर‍िस्‍थि‍त‍ियां बनीं जिन्‍होंने सोमशेखर का इम्तिहान लिया। लेकिन, वह टस से मस नहीं हुए। 2013 में उनके पिता की मौत हो गई थी। इस घटना का उनकी जिंदगी पर गहरा असर पड़ा। इसने उनके पूरे नजरिये को बदल डाला। उन्होंने स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका में सुधार लाने को मिशन बना लिया। इसी मिशन को ध्‍यान में रखकर सोमशेखर ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में अपनी मिलेट्स फर्म की नींव रखी।

पिता को नहीं बचा सके सोमशेखर

पिता को नहीं बचा सके सोमशेखर

सोमशेखर पोगुला ने एमबीए किया हुआ है। मिलेट इंडस्‍ट्री में छल साल तक वह संभावनाएं तलाशते रहे। उन्‍होंने यह रास्‍ता एक दर्दनाक अनुभव के बाद चुना था। इसने पोषण और आहार संबंधी आदतों को लेकर उनके नजरिये को बदल दिया था। मिलेट कारोबार में उनका सफर 2013 में एक महत्वपूर्ण घटना के बाद शुरू हुआ। सोमशेखर के पिता को गुर्दे की बीमारी हो गई थी। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्‍हें सटीक कारण का पता नहीं चला। महीनों तक अस्पताल के चक्कर लगाने और बढ़ते मेडिकल बिलों के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। फिर सोमशेखर के पिता 2013 में बीमारी से जंग हार गए।

अस्‍पताल में दिखा खतरनाक ट्रेंड

जब पिता अस्पताल में भर्ती थे तब सोमशेखर पोगुला का ध्‍यान एक चिंताजनक ट्रेंड पर गया। कई मरीज खराब खान-पान की आदतों के कारण बीमारियों से पीड़ित थे। उन्‍होंने युवाओं को डायबिटीज से पीड़ित देखा। इसने उन्‍हें सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इन स्वास्थ्य समस्याओं की व्यापकता आधुनिक कृषि पद्धतियों में कीटनाशकों और रसायनों के भारी इस्‍तेमाल का परिणाम थीं। हालांकि, कृषि स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा सिर्फ इस अहसास तक सीमित नहीं थी। सोमशेखर की खेती से जुड़ी पृष्ठभूमि थी। उन्‍होंने कृषक समुदायों के सामने चुनौतियों को गहराई से समझा। इसमें गांवों में किसानों की आत्महत्या का संकट भी शामिल था। उन्होंने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ खुद को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में किसानों के लिए समर्पित करने का साहसी फैसला लिया।

2017 में शुरू की मिलेट्स फर्म

शुरुआत में सोमशेखर ने उन किसानों के साथ सहयोग किया जो प्राकृतिक और जैविक खेती करते थे। समय के साथ कुछ किसानों ने कीटनाशकों का इस्‍तेमाल शुरू किया। बेहतर पैदावार हासिल की। इससे अन्य लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हुए। सोमशेखर का नजरिया इन किसानों पर नए तरीके थोपना नहीं था, बल्कि उन पारंपरिक जैविक प्रथाओं को फिर से शुरू करना था जो उनकी विरासत में गहराई से निहित थीं। अदिति मिलेट्स ने 2017 में 30 किसानों के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। तब से 200 से ज्‍यादा किसान इसके साथ जुड़ गए। कंपनी का सालाना रेवेन्‍यू 2 करोड़ रुपये है। सोमशेखर ने कुरनूल के तीन जिलों और सात गांवों में इस पहल को ‘मिलेट्स टू मिलियंस’ नाम दिया।

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