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‘सच यही है… ऐसी औलाद को फांसी दें…’ महिला के रेप और मर्डर केस में मां की गवाही पर बेटे को उम्रकैद

बॉलिवुड मूवी मदर इंडिया की कहानी आज भी लोगों के जहन में है। यह कहानी है उस मां की जो बड़े संघर्ष से अपने बेटे को पालती है। आखिर में अपराध की राह पर निकले बेटे को खुद सजा देती है। ऐसा सिर्फ फिल्मों में ही होता है। रियल लाइफ में मां अपने अपराधी बेटे को हर तरह से बचाने की कोशिश करती है। इससे वपरीत एक मामला त्रिपुरा में सामने आया है। यहां पर एक मां ने अपने बेटे को सजा दिलाने के लिए कोर्ट में गवाही दी। कोर्ट ने मां की गवाही पर ही बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मां ने कोर्ट में कहा कि ऐसी औलाद को फांसी पर लटका दें। महिला ने कहा कि वह सच्चाई का साथ देगी और उसके बेटे ने ही दोस्त के संग मिलकर महिला की हत्या की है।

त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिला अदालत में यह मामला चल रहा था। अदालत ने बिशाल नगर परिषद में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करने वाली 55 वर्षीय विधवा कृष्णा दास की हत्या के आरोप में सुमन दास (24) और उसके दोस्त चंदन दास (26) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

कुएं में फेंक दिया था शव

मामला अप्रैल 2020 में हुआ जब सिपाहीजाला में अकेले रहने वाले कृष्ण दास पर बेरहमी से हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, दोनों दोषियों ने गला घोंटकर हत्या करने से पहले उसके घर में उसके साथ बलात्कार किया। बाद में, उन्होंने उसके शव को एक परित्यक्त कुएं में फेंक दिया। शव बरामद होने के बाद मृतक की बहू सुमित्र दास ने प्राथमिकी दर्ज कराई।

पुलिस ने दाखिल किया आरोपियों के कबूलनामे का आरोपपत्र

पुलिस ने मामला दर्ज किया और अपनी जांच के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके कबूलनामे के आधार पर आरोप पत्र दायर किया गया। पुलिस ने सुमन की मां सहित 25 लोगों के बयान दर्ज किए, जिन्होंने अपने बेटे के खिलाफ गवाही दी थी।

मांगी मांगी बेटे के लिए मौत की सजा

जिला अदालत में अतिरिक्त लोक अभियोजक गौतम गिरि ने कहा, ‘मामला तब बदल गया जब सुमन की मां नमिता दास ने सही का साथ देने का फैसला लिया। उन्होंने लगभग एक महीने पहले मुकदमे के दौरान उसके बेटे और उसके दोस्त के लिए सजा-ए-मौत मांगी।’ पुलिस ने आरोपी व्यक्तियों का इकबालिया बयान पेश किया। नमिता ने मुकदमे में गवाही देते हुए अपने बेटे के लिए मौत की सजा की भी मांग की।

रेप के आरोप से बरी हुए आरोपी

गौतम गिरि ने कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि मुकदमे के दौरान बलात्कार के आरोप की पुष्टि नहीं की जा सकी। चूंकि हत्या के एक हफ्ते बाद क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था, इसलिए बलात्कार का पता लगाने के लिए चिकित्सा परीक्षण कराना संभव नहीं था। आरोपियों को बलात्कार के आरोप से मुक्त कर दिया गया। अदालत ने दोनों दोषियों के लिए कठोर आजीवन कारावास का आदेश दिया, साथ ही साथ अतिरिक्त तीन साल की सजा सुनाई

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