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एचईसी बंद होने के कगार पर! 1623 ठेका कर्मचारियों की ‘नो एंट्री’ के आदेश के बाद सभी को गेट के बाहर रोका गया

आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे भारी अभियंत्रण निगम (एचईसी) के ठेका कर्मचारियों को आज एक बड़ा झटका लगा है। एचईसी के लगभग 1632 ठेका कर्मियों (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) को गेट के अंदर जाने से प्रबंधन ने रोक लगा दिया है। प्रबंधन की ओर से वजह बताया जा रहा है कि कॉन्ट्रैक्ट पर मजदूरों को उपलब्ध कराने वाली कंपनी का 31 अगस्त तक एचईसी के साथ कॉन्ट्रैक्ट था। ठेका मजदूर उपलब्ध कराने वाली कंपनी और एचईसी के बीच कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल नहीं होने के कारण ठेका कर्मियों को एचईसी में आज से काम के लिए रोक दिया गया है।

एचईसी की आर्थिक तंगहाली है मुख्य वजह

1600 से अधिक ठेका कर्मचारियों को आज से काम पर नहीं लेने के पीछे मुख्य वजह एचईसी की आर्थिक तंगहाली है। एचईसी को ठेके पर मजदूर उपलब्ध कराने वाली कंपनी को एचईसी प्रबंधन की ओर से पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस वजह से जिस कंपनी ने एचईसी को ठेके पर मजदूर उपलब्ध कराए थे उसे कंपनी ने दोबारा कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यूअल करना सही नहीं समझा। ठेका मजदूर उपलब्ध कराने वाली कंपनी और एसीसी के बीच बीते कल यानी 31 अगस्त तक का कॉन्ट्रैक्ट था। एचईसी प्रबंधन की ओर से पैसे का रोना लेकर कॉन्ट्रैक्ट कंपनी को समय पर भुगतान नहीं किया गया है। इस वजह से कॉन्ट्रैक्ट कंपनी ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने में रुचि नहीं ली। एचईसी प्रबंधन और कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के बीच टेंडर प्रक्रिया के तहत एक साल के लिए एग्रीमेंट होता है इस दौरान कॉन्ट्रैक्ट कंपनी प्रबंधन को ठेका मजदूर उपलब्ध कराती है। इसके आवाज में एसीसी प्रबंधन,कॉन्ट्रैक्ट कंपनी को पैसे का भुगतान करती है इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट कंपनी अपने मजदूरों को वेतन देती है।

नई कंपनी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने की कर रही है तैयारी

जानकारी के मुताबिक एचईसी प्रबंधन को ठेका पर मजदूर उपलब्ध कराने के लिए एक दूसरी कंपनी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही है। एचईसी प्रबंधन के जानकारों की माने तो यदि कॉन्ट्रैक्ट कंपनी इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो महज कुछ कागजी कार्रवाई के बाद कॉन्ट्रैक्ट कंपनी को एचईसी प्रबंधन मजदूर उपलब्ध कराने का जिम्मा दे सकती है। लेकिन पूरी कागजी प्रक्रिया होने से पहले तक एचईसी प्रबंधन किसी भी ठेका कर्मचारि को काम पर लेने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।

18 महीने का बकाया है वेतन

एचईसी के खस्ता हाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के अधिकारियों और कर्मचारी का वेतन एक साल से अधिक का बकाया हो गया है। एचईसी के अधिकारियों को पिछले 18 महीने का वेतन बकाया है जबकि कर्मचारियों का 14 महीने का वेतन बकाया चल रहा है। वेतन नहीं मिलने से नाराज एचईसी के अधिकारियों ने पिछले दिनों लगातार 5 महीने तक आंदोलन किया था। लेकिन इस लंबे आंदोलन का सकारात्मक परिणाम उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा। मजबूरी में आकर उन्होंने आंदोलन का रुख छोड़ दिया और फिर से एक बार काम पर लौट गए।एचईसी अधिकारियों को अप्रैल महीने में एक साथ सिर्फ दो महीने का वेतन दिया गया इसके बाद उन्हें वेतन के लिए फिर से सिर्फ इंतजार करने का काम मिला है।

रिक्शा चलाने और सब्जी बेचने को मजबूर हैं एचईसी कर्मचारी

एचईसी के खराब आर्थिक स्थिति का खामियाजा यहां के कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है। पैसे के अभाव में एचईसी कर्मी अपने घर को जैसे तैसे चलने को मजबूर हो गए हैं। घर चलाने के लिए इन्हें आप कर्ज लेना पड़ रहा है। कई लोगों को पैसे के अभाव में बच्चों की पढ़ाई रोकनी पड़ गई है। इसके अलावा बीमार पड़ने पर इलाज के लिए भी एचईसी के कर्मचारियों और उनके परिजनों को दर-दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी दयनीय हो गई है कि कई कर्मचारी है अब एचईसी में ड्यूटी करने के बाद बचे हुए समय में ई-रिक्शा चलाने को मजबूर हो गए हैं। इनका कहना है कि कंपनी से पैसे नहीं मिलने के कारण उनके सामने रिक्शा चलाने के सिवा और कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। वहीं कुछ कर्मचारी धुर्वा इलाके में लगने वाले मंगलवार और शुक्रवार को शालीमार बाजार जबकि रविवार और गुरुवार को सेक्टर 2 सब्जी हाट में सब्जी बेचने को मजबूर हैं। ड्यूटी खत्म होती हैं कर्मचारी रिक्शा चलाने लग रहे हैं वहीं कुछ कर्मचारी हाट बाजार में सब्जी बेचते आसानी से देखे जा सकते हैं।

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