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राहुल अमेठी से चुनाव लड़ें, जैसे वो हारे थे वैसे ही स्मृति ईरानी भी हारें… गांधी परिवार के ‘कब्जाए’ गढ़ में बदल रही हवा?

कांग्रेस का गढ़ रहे अमेठी में राहुल गांधी के चुनाव लड़ने को लेकर राजनीतिक बहस गांव गलियारों तक पहुंच गई है। अगर ऐसा होता है तो राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। अमेठी के लोगों से बात करके यह जानने की कोशिश की गई है कि अगर आज चुनाव हुए तो यहां के लोग राहुल गांधी और स्मृति इरानी में से किसे अपना सांसद चुनेंगे। इस पर लोगों ने जो जवाब दिए हैं, वो यहां एक दिलचस्प चुनावी लड़ाई की ओर इशारा कर रहे हैं।

अमेठी के रहने वाले अशोक सरोज कहते हैं कि राहुल गांधी अगर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं तो हम सब अच्छे मतों से उन्हें जिताकर भेजेंगे। स्मृति इरानी ने जो भी काम किया है, कुछ लोगों के हित में किया है और व्यापक रूप में कोई भी काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब अमेठी में थे तो अमेठी का नाम विश्व पटल पर था लेकिन हम सब फिर कोशिश करेंगे कि अमेठी का नाम फिर विश्व में हो।

संचित पांडेय का कहना है कि राहुल गांधी अगर इस बार अमेठी से चुनाव लड़ेंगे तो एक लाख से ज्यादा वोट से जीतेंगे। स्मृति इरानी ने 13 रुपये किलो चीनी देने का वादा किया था और वह नहीं हो पाया। राहुल गांधी के जीतने से अमेठी का नाम पूरे विश्व मे होगा। राजेश मिश्र का कहना है कि अमेठी को यहां के नेता लोग पिकनिक स्थल बना दिए हैं। यहां जनता की कोई सुनने वाला नहीं है। सड़कें खस्ताहाल हैं। आवारा जानवर से परेशान हैं। महंगाई चरम पर है। भ्रष्टाचार है। अधिकारी बेलगाम हैं। अब जनता चाहती है कि राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ें। जब दोनों नेता लड़ेंगे तो एक तो धराशायी ही होगा और अमेठी की जनता भी यही चाहती है कि राहुल गांधी और स्मृति ईरानी दोनों लोग चुनाव लड़ें। जैसे राहुल गांधी चुनाव हारे थे, वैसे स्मृति ईरानी भी चुनाव हारें।

उन्होंने कहा कि अमेठी की जनता बहुत परेशान है और बहुत जल्दी इंसाफ करती है। चाहे संजय गांधी रहे हों या कैप्टन सतीश शर्मा या गायत्री प्रसाद प्रजापति, जनता अपने पास नहीं रखती है। स्मृति इरानी अमेठी से चुनाव नहीं जीतेंगी। छत्रशाल सिंह का कहना है राहुल गांधी अगर अमेठी से चुनाव लड़ेंगे तो बहुत अच्छी बात है और अमेठी को उम्दा प्रत्याशी मिलेंगे। दोनों में कांटे की टक्कर होगी लेकिन स्मृति इरानी ऐंटी इन्कम्बेंसी की शिकार होंगी। स्मृति इरानी के प्रतिनिधियों से जनता नाराज है और इसका खामियाजा स्मृति इरानी को झेलना पड़ेगा।

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