तुम मेरा खून पिओ…मैं तुम्हें जान लूंगा
फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में मच्छरों पर बोला गया नाना पाटेकर का यह डायलॉग आज भी काफी मशहूर है, ‘एक मच्छर आदमी को… बना देता है।’ वैसे मच्छर कुछ बनाए या न बनाए, लेकिन बीमार और गंभीर बीमार जरूर बना देता है। खासकर तब जब बीमारी के लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए। उसकी गंभीरता को न समझें। वैसे एक बात समझ लें कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ मच्छर के काटने से ही डेंगू या मलेरिया हो जाएगा। उस मच्छर की लार में डेंगू का वायरस या फिर मलेरिया के लिए प्लाज्मोडियम के जीवाणु मौजूद हों तो ही यह मुमकिन है। पर इसके लिए भी यह जरूरी है कि शरीर में पहुंचने वाला ये जीवाणु या फिर वायरस हमारे शरीर की इम्यूनिटी को हरा दें। इसके बाद ही हम बीमार पड़ते हैं।
मच्छर सिर्फ हानि ही नहीं पहुंचाते बल्कि ये फूलों पर जब रस खींचने के लिए बैठते हैं तो साथ में पराग कणों के साथ ही उड़ते हैं। जब ये दूसरे फूलों पर बैठते हैं तो उस फूल को फर्टिलाइज कर देते हैं। इसके बाद ही फूल से फल का निर्माण होता है यानी ये पॉलिनेशन (परागण) की प्रक्रिया को पूरी करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सैकड़ों प्रजातियां हैं मच्छरों की: मच्छर की आज ज्ञात 3600 प्रजातियां है। पर हमें जो सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह है एडीज इजिप्टी (डेंगू और चिकनगुनिया का कारण) और फीमेल एनोफिलीज (मलेरिया का कारण)। अगर इनसे बच गए तो डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से भी बच सकते हैं।
इंसानों से पहले से मौजूद हैं मच्छर: मच्छरों का विकास इंसानों से काफी पहले हुआ है। ये डायनासोर के वक्त भी थे और आज भी हैं। मच्छरों का सबसे पुराना जीवाश्म करीब 8 करोड़ साल पुराना है।
किस देश में मच्छर नहीं: दुनिया के लगभग हर देश में मच्छर हैं। हां, आइसलैंड में मच्छर नहीं पाए जाते। इसके अलावा अंटार्कटिका की ठंड में भी मच्छरों का जीवित रहना मुश्किल है।
क्या किसी खास ब्लड ग्रुप वाले को ज्यादा काटते हैं मच्छर: इस तरह का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि ब्लड ग्रुप की वजह से किसी शख्स को मच्छर ज्यादा काटे।




