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सुप्रीम कोर्ट ने इतना सुना दिया, कुर्सी पर चिपके मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह का क्या जागेगा जमीर?

मणिपुर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। अगर वहां हालात इतने खराब थे तो पुलिस को कार्रवाई करने से किसने रोका? एक चीज तो साफ है कि 4 मई से 27 जुलाई तक राज्य में पुलिस का शासन नहीं था। या तो वो कार्रवाई करना नहीं चाहती है थी या कार्रवाई करने में अक्षम थी। राज्य में संवैधानिक संस्था पूरी खत्म हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट की ये कुछ टिप्पणियां हैं जो उसने मणिपुर मामले की सुनवाई के दौरान कहीं। हर मुद्दे पर राज्य सरकार को फटकराते हुए शीर्ष अदालत ने मणिपुर के डीजीपी को भी तलब कर लिया है। इतनी सख्त टिप्पणी के बाद भी राज्य के मुखिया एन बीरेन सिंह अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग तो कर रहा है लेकिन आखिर उनका जमीर कब जागेगा?विपक्षी दल तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं। सुरक्षाबलों की सैकड़ों टुकड़ियां मणिपुर में तैनात हैं। लेकिन कुकी और मैतई समुदाय के बीच झगड़ा अभी भी पूरी तरह से थम नहीं है। किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा राज्यपाल करते हैं। लेकिन फिलहाल राज्यपाल अनुसुइया उइके की तरफ से ऐसी कोई अनुशंसा नहीं की गई है। बिहार में तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले पर इस्तीफा मांगने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अभी तक अपने सीएम का इस्तीफा भी नहीं लिया है।

आखिर कब जागेगा सीएम का जमीर?

सुप्रीम कोर्ट ने एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को मणिपुर हिंसा के लिए मंगलवार को जमकर फटकार लगाई। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, ज्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की स्टेट्स रिपोर्ट बताती है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई। लोगों के बयान दर्ज करने में देरी हुई। यहीं नहीं, केवल कुछ लोगों की ही गिरफ्तारी हुई थी। राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। इतनी फटकार के बाद भी बीरेन सिंह अपने पद पर बने हुए हैं। आखिर उनका जमीर कब जागेगा? कुछ दिन पहले बीजेपी ने उन्हें दिल्ली तलब किया था। इसके बाद बीरेन सिंह के इस्तीफे की खबर उड़ी। लेकिन बीजेपी के सीएम अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं।

बयानवीर बने हुए हैं बीरेन सिंह

राज्य में इतनी खराब हालत के बाद भी उन्होंने एक बयान दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कारगिल विजय दिवस पर कहा था कि ड्रग स्मगलर्स और राज्य में अवैध तरीके से घुसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाद राज्य में ऐसे हालात पैदा हुए हैं। उन्होंने साफ कहा कि मणिपुर सरकार कुकी समुदाय के खिलाफ नहीं है। यही नहीं, उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सरकार और उन लोगों के बीच है जो राज्य की शांति और अखंडता को खराब करना चाहते हैं। उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार मणिपुर में गैरकानूनी तरीके से घुसने वाले लोगों पर कार्रवाई करना जारी रखेगी।

विपक्ष को मिल गया हथियार

सुप्रीम की तल्ख टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों का बीजेपी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। विपक्षी दल पहले से ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं। शीर्ष अदालत की इतनी सख्त टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों को बीजेपी नर हमला करने का हथियार मिल चुका है। कुछ दिन पहले ही I.N.D.I.A. के सांसद मणिपुर दौरे पर गए थे और वहां की जमीनी हालात का जायजा लिया था। विपक्षी दलों ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी।

राज्य में कानून का शासन नहीं- SC

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा, ‘क्या दो महीने तक स्थिति FIR लिखने जैसी भी नहीं था। इससे हमे ये लगता है कि मई के शुरुआत से जुलाई के अंत तक राज्य में कानून का शासन नहीं था।

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