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हुमा कुरैशी ने कहा- बतौर इंडस्ट्री हमको सोचना चाहिए कि हमें टिकट बेचने हैं या समोसे

हुमा कुरैशी पिछले दिनों फिल्म ‘तरला’ में नजर आईं जिसमें उनके रोल को दर्शकों ने काफी सराहा। हमसे खास मुलाकात में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री, अपने करियर और कोविड के दौरान बीते मुश्किल समय को लेकर बातचीत की।

बॉक्स ऑफिस पर आजकल कुछ ही फिल्में अच्छा कर पा रही हैं। आप इस बारे में क्या सोचती हैं?

(हंसते हुए) मैं सोचती नहीं हूं बल्कि समझना चाहती हूं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि लोगों का टेस्ट बदला है और सिनेमा में जाकर फिल्म देखना महंगा भी हो गया है। बतौर इंडस्ट्री हमको सोचना चाहिए कि हमें टिकट बेचनी है या समोसे। मेरा मानना है कि फिल्मों को लोगों की पहुंच में लाने की जरूरत है। जो व्यक्ति 10 हजार कमाता है, उसके लिए सिनेमा में जाकर फिल्म देखना बहुत मुश्किल है। तो हम ऐसी फिल्में भी बनाएं, अच्छे सब्जेक्ट चुनें और कैसे टिकट प्राइस भी ऐसे मैनेज करें कि सब उसको अफोर्ड कर पाएं। इस बारे में काम होना चाहिए।

आपने साउथ की फिल्मों में भी काफी काम किया है। आजकल ये ट्रेंड बढ़ा है। तो इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी और आपका कैसा अनुभव रहा?
मेरा काफी अच्छा अनुभव रहा है। मैं तो शुरू से साउथ की फिल्मों में काम करती आ रही हूं। मैंने काला और वलीमई जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया है। मुझे लगता है कि पैन इंडिया या ग्लोबली कुछ नहीं होता। बतौर कलाकार आपको जहां अच्छा काम मिले आपको करना चाहिए।आपको फिल्मों से ज्यादा ओटीटी शोज के लिए स्टारडम मिला है। तो ये कैसा अनुभव होता है?
ये अपने आप में एक नया चलन है। मैं इससे काफी खुश हूं कि कोविड के बाद मैं काफी काम में बिजी थी। कोविड में ही हम बेल बॉटम शूट के लिए देश से बाहर चले गए थे। वहां से लौटे तो काम रुका नहीं। उसके बीच में महारानी भी आ गई थी। कोविड में लोगों ने उसे देखा और काफी पसंद किया था। मैं इसके लिए सुभाष कपूर और नंदन उमा जी को शुक्रिया कहना चाहूंगी कि उस मुश्किल समय में आपने ‘महारानी’ को बनाया। हम जल्द ही इसके सीजन 3 की शूटिंग भी शुरू करने वाले हैं।

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