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सारनाथ में होगा मल्टी फंक्शनल पार्किंग का निर्माण, पथरी की सर्जरी और निकाल दी बच्चेदानी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन सुविधाओं की योजनाओं को गति देने का कार्य किया जा रहा रहा है। इस क्रम में भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्‍थली सारनाथ में यूपी की योगी सरकार मल्‍टी फंक्‍शनल पार्क बनवाएगी। करीब 18 हजार स्‍क्‍वायर मीटर एरिया में ये ओपन पार्क बनाया जाएगा। धमेख स्‍तूप के पास प्रस्‍तावित पार्क में सामाजिक गतिविधियों के साथ ही फूड कोर्ट, विशेष उत्‍पादों की प्रदर्शनियों के लिए एग्‍जीबिशन पविलियन आदि की सुविधा होगी। वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्‍यक्ष अभिषेक गोयल ने बताया कि 179 लाख रुपये की लागत से बनने ने वाले पार्क में भगवान बुद्ध पर आधारित लैंड स्‍केपिंग और स्‍कल्‍पचरल कोर्ट, फाउंटेन पौंड, वेंडर जोन, पविलियन आदि बनाया जाएगा। सामाजिक कार्यों के लिए बड़ा ओपन स्‍पेस, मंच विशेष अवसरों के लिए स्विस कॉटेज और ग्रीन रूम की सुविधा भी उपलब्‍ध होगी। मल्‍टी फंक्‍शनल पार्क एरिया के लिए पर्यटन विभाग को प्रस्‍ताव भेजा गया है। सारनाथ में हर साल देश-विदेश से लाखों की संख्‍या में पर्यटक आते हैं। कोई व्‍यवस्थित और सुविधा युक्‍त पार्क न होने से पर्यटकों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है। इसे देखते हुए मल्‍टी फंक्‍शनल पार्क बनाने का प्‍लान तैयार किया गया है।

पथरी की सर्जरी में निकाली दी बच्‍चेदानी

वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र स्थित एक नर्सिंग होम में महिला की पथरी के ऑपरेशन के दौरान लापरवाह डॉक्टरों ने उसकी बच्‍चेदानी निकाल दी। डॉक्टरों की इस गलती से महिला अब कभी मां नहीं बन पाएगी। मामले की जानकारी होने पर परिवारीजनों ने चिकित्‍सक के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए चोलापुर थाने में तहरीर दी। पुलिस के मुकदमा न लिखने पर अदालत में गुहार लगाई। अदालत के आदेश पर तीन साल बाद अब नर्सिंग होम के संचालक डॉ. प्रवीण तिवारी और आशा वर्कर आशा यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि आशा कार्यकत्री ही पेट में दर्द होने की शिकायत पर पीड़िता को नर्सिंग होम में इलाज के लिए ले गई थी।

शर्तों के साथ होगा बड़ी नावों का संचालन

वाराणसी में गंगा का जलस्‍तर धीरे-धीरे घटने से बड़ी नावों को शर्तों के साथ संचालन की छूट दी गई है। दशाश्‍वमेध घाट पर गुरुवार को जल पुलिस थाने में सहायक पुलिस आयुक्‍त (दशाश्‍वमेध) के साथ नाविकों की बैठक हुई। इसमें क्षमता से आधी संख्‍या में सवारी बैठाकर बड़ी नावों और मोटर बोट चलाने पर सहमति बनी। तय हुआ कि जिस मोटर बोट की क्षमता 50 यात्रियों के बैठने की है, उस पर 25 लोग ही बैठेंगे। सभी यात्री लाइफ जैकेट अवश्‍य पहनेंगे। मोटर बोट का संचालन सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक ही होगा। शाम पांच बजे के बाद सभी प्रकार की नाव का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।

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