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‘मणिपुर में फेल हो गया डबल इंजन, राष्ट्रपति शासन की दरकार’, मणिपुर हिंसा पर क्या सोचता है देश, सर्वे में आया सामने

मणिपुर की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। लगभग 3 महीने से जारी हिंसा के चलते वहां सब अस्त-व्यस्त हो गया है। वीडियो इतने भयावह, दर्दनाक और शर्मसार हैं कि कहा नहीं जा सकता। पूरे देश में इसे लेकर गुस्सा है। इस बीच भारत की प्रमुख चुनाव एजेंसी सीवोटर की ओर से किए गए एक विशेष सर्वे से पता चला है कि अधिकांश भारतीयों की राय है कि एनडीए की डबल इंजन सरकार मणिपुर में विफल हो गई है। गौरतलब है कि ज्‍यादातर लोगों की राय है कि मई की शुरुआत से राज्य में फैली हिंसा को रोकने के लिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की जरूरत है। सर्वे में शामिल 87 फीसदी लोगों ने मणिपुर के बलात्कारियों को फांसी देने के पक्ष में हैं।

लोगों ने कहा- विफल हो गई डबल इंजन सरकार
सीवोटर सर्वे के दौरान पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि मणिपुर में हिंसा राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार की पूरी विफलता को दर्शाती है? कुल मिलाकर, लगभग 57 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सकारात्मक उत्तर दिया, जबकि लगभग 30 प्रतिशत ने असहमति जताई। गौरतलब है कि एनडीए का समर्थन करने वाले उत्तरदाताओं में से भी एक बड़ा हिस्सा कहता है कि डबल इंजन सरकार विफल रही है। 58 प्रतिशत लोग यह भी मानते हैं कि भाजपा और केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से मणिपुर में हिंसा रोकने में विफल हो रही है।

87 फीसदी लोग मणिपुर के बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड के पक्ष में
सीवोटर सर्वे के दौरान पूछा गया कि मणिपुर में हो रही हिंसा के दौरान महिलाओं के साथ क्रूरता और सामूहिक बलात्कार के कुछ भयावह वीडियो सामने आए हैं। आपके अनुसार क्या ऐसे कृत्यों के दोषियों को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए? कुल 87 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विशाल बहुमत ने सकारात्मक उत्तर दिया, जबकि चार प्रतिशत से भी कम इससे असहमत थे। इस मामले में एनडीए और विपक्षी दलों के समर्थकों की राय लगभग एक सी है।

62 फीसदी ने कहा- लगाया जाए राष्ट्रपति शासन
सर्वे में पता चला है कि करीब 62 फीसदी उत्तरदाता चाहते हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। एनडीए समर्थकों का बड़ा बहुमत 54 प्रतिशत चाहता है कि राष्ट्रपति शासन लगाया जाए, जबकि एक तिहाई से भी कम लोग इस तर्क से सहमत नहीं हैं। पूर्वोत्तर राज्य 3 मई से अनियंत्रित हिंसा की चपेट में है। जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि स्वदेशी मैतेई जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए तो कुकी जनजाति के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी और मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को फटकार लगाई।

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