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यह नदी नहीं, कानपुर का व्यस्त इलाका है…आखिर खलवा पुल में डूबकर मरने वालों की संख्‍या क्‍यों बढ़ती जा रही

यूपी के कानपुर का जूही ढ़ालूपुल (खलवा पुल) इंसानों के लिए काल बनता जा रहा है। जूही ढालूपुल में गत पांच सालों में चार लोग जल समाधि ले चुके हैं। बरसात के दिनों में ढ़ालूपुल नदी में तब्दील हो जाता है। बीते दिनों जोमैटो डिलीवरी ब्वाय की पुल में डूबकर मौत हो गई थी। डिलीवरी ब्वाय की मौत के बाद सियासी पारा चढ़ गया। इसपर जमकर राजनीति हुई, और नगर-निगम के जिम्मेदार अधिकारी निशाने पर थे। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ढ़ालूपुल में पानी क्यों भरता है, इसके पीछे तकनीकी खामी क्या है।जूही थाना क्षेत्र स्थित ढ़ालूपुल (खलवा पुल) का निर्माण अंग्रेजों ने कराया था। अंग्रेजों ने पुल का निर्माण उस वक्त की आबादी के हिसाब से कराया था। इसके साथ ही ढ़ालूपुल के नीचे अंडरग्राउंड पाइप पड़े हुए हैं। पुल का पानी सीसामऊ नाले से होकर सीधे गंगा में गिरता था। जब सीसामऊ नाले को टेप किया गया, तो ढ़ालूपुल के नीचे पड़ी पाइप लाइनों को ढ़ूंढने में बड़े-बड़े इंजीरियरों के पसीने छूट गए थे।

तीन करोड़ की लागत से बना संपवेल

ढ़ालूपुल के जलभराव को रोकने के लिए नगर निगम ने 2017 में तीन करोड़ की लागत से जल निकासी के लिए संपवेल का निमार्ण कराया था। इस संपवेल मोटर लगाईं गईं हैं। संपवेल में लगी मोटर पुल में भरे पानी को निकालने का काम करती है। लेकिन संपवेल का निर्माण होने के बाद भी ढ़ालूपुल का जलभराव कम नहीं हुआ। इसके साथ ही साल दर साल डूब कर मरने वालों का आकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।

संपवेल में लगी हैं चार मोटर

ऑपरेटर प्रदीप ने बताया कि संपवेल में चार मोटर लगाई गईं हैं जिसमें से एक मोटर खराब है। दो मोटर चालू हालत में हैं, एक मोटर को रिजर्व में रखा गया है। प्रदीप का कहना है कि हल्की और मध्यम बारिश होती है, तो पुल का पानी आसानी से निकल जाता है। लेकिन जब लगातार तेज बारिश होती तो, पुल में जलभराव हो जाता है। संपवेल से पानी निकालने में दो से ढाई घंटे का समय लगता है। पानी निकलने के बाद पुल के नीचे कीचड़ जमा हो जाता है।

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