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नीतीश कुमार का दावा वो देश के पहले ‘नीतीश’, मगर Google ने क्या कहा

‘इसका नाम है नीतीश कुमार मंडल। मेरा नाम ले लिया। जब मेरा नाम था तो देश में किसी का नाम नहीं था। मेरे पिता ने मेरा नाम दिया। समझ गए। अब आजकल ढेर आदमी नाम रखता है। यही मैं सोच रहा था कि इसका नाम कैसे है…!’ वैसे भारत में किसी व्यक्ति के नाम और सरनेम पर अब तक कॉपीराइट कानून लागू नहीं होता है। अगर देश के संविधान में किसी व्यक्ति के नाम पर कॉपीराइट का जिक्र होता तो शायद नीतीश कुमार मंडल नाम का फरियादी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने नहीं होता। फरियादी वाली कुर्सी पर वो नौजवान तो होता मगर उसका नाम नीतीश कुमार मंडल नहीं होता।

नीतीश को Google करने पर क्या मिला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि वे इस देश के पहले ‘नीतीश’ हैं। उन्होंने ये दावा 15 मई को जनता दरबार में किया था। जब वो लोगों की फरियाद सुन रहे थे। तब ये बात आई-गई हो गई थी। आमतौर पर जब कोई बात दिमाग में अटक जाती है तो गूगल में खोजबीन करने पर काफी मदद मिल जाती है। कुछ न कुछ क्लू मिल ही जाता है। तो नीतीश कुमार के दावे को गूगल किया गया। सर्च के दौरान पता चला कि सही नीतीश में ‘न’ पर छोटी ‘इ’ की मात्रा लगती है मतलब सही ‘नितीश’ ऐसे लिखते हैं। मगर बिहार के मुख्यमंत्री ‘न’ और ‘त’ दोनों में बड़ी ‘ई’ की मात्रा लगाते हैं। वैसे भी नाम लिखने में व्याकरण की बाध्यता खत्म हो जाती है। तो इसमें सही-गलत की कोई बात नहीं रह जाती है।

Google ने बताया नीतीश नाम का मतलब

नीतीश नाम के मतलब के बारे में जब गूगल किया गया तो पता चला कि ये दक्षिण एशियाई समुदाय के लोगों का नाम है। इसका अर्थ है सही रास्ते या सही रास्ते का स्वामी। थोड़ी और खोजबीन की गई तो मालूम हुआ कि नैतिकता और नैतिकता के भगवान यानी कृष्ण का नाम। एक और सर्च में पता चला कि नितीश नाम का मतलब कानून के देवता, अच्छी तरह से कानून में निपुण, सही रास्ते के अनुयायी, सही रास्ते के स्वामी होता है। इसे शिव से भी जोड़ा गया।

‘मैं देश का पहला नीतीश’ सर्च का रिजलट

सबसे इंट्रेस्टिंग रहा नीतीश के दावे की खोज यानी ‘मैं देश का पहला नीतीश’। गूगल में जब इसे सर्च किया तो उसने अलग-अलग सरनेम वाले 10 नीतीश के बारे में जानकारी दे दी। मगर सबकी उम्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कम थी। कोई वैसा नहीं था, जो नीतीश कुमार से उम्र में बड़ा हो। नीतीश कुमार का जन्म मार्च 1951 में हुआ। जबकि गूगल सितंबर 1998 का है। ऐसे में 25 साल का गूगल 73 साल के नीतीश के दावे को मात देने में नाकाम रहा। गूगल ये नहीं बता पाया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश के पहले नीतीश हैं या फिर उनसे पहले भी कोई नीतीश नाम का शख्स था।

‘मैं देश का पहला नीतीश’ की बात कहां से उठी

15 मई को जनता दरबार में आते के साथ एक नौजवान अपनी समस्या सुनाने लगा, एक सुर में सब कुछ कहते चला गया। उसने कहा कि राशन कार्ड बनवाने के लिए बार-बार ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ता है। ये सिर्फ मेरी ही नहीं पूरे गांव की समस्या है। इस दौरान नीतीश कुमार एप्लिकेशन पर नाम-पता पढ़ चुके थे। इसके बाद उन्होंने अपनी हाथ चाय वाली कप की ओर कर दिया। नौजवान को चेहरे को चुपचाप देखते हुए चाय की चुस्की लिए। कप को प्लेट में रखते ही मुस्कुराकर बोले ‘मेरा ही नाम ले लिए हैं आप…! इतना कहने के साथ ही खिलखिलकर हंस दिए।

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