झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का नया अध्यक्ष चुना गया है। वे पार्टी के चौथे अध्यक्ष हैं और यह उनके राजनीतिक जीवन में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। अध्यक्ष पद संभालते हुए हेमंत ने इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि वे पार्टी की विचारधारा और जनआंदोलनों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हेमंत सोरेन से पहले तीन लोग इस पद पर रह चुके हैं। इनमें उनके पिता और पार्टी के संस्थापक नेता शिबू सोरेन शामिल हैं, जिन्होंने झारखंड के निर्माण और आदिवासी अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया। शिबू सोरेन के अलावा दो अन्य नेताओं ने भी झामुमो की कमान संभाली थी। विशेष बात यह है कि झामुमो के पहले अध्यक्ष सोरेन परिवार से नहीं थे, लेकिन पार्टी की जड़ें हमेशा सामाजिक न्याय और आदिवासी हितों में गहराई से जुड़ी रही हैं।
पार्टी के नए अध्यक्ष के रूप में हेमंत सोरेन की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य में राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदल रहा है और विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है। इस नए दायित्व को उन्होंने पूरे उत्साह और संकल्प के साथ स्वीकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “पार्टी का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं झारखंड की जनता के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करता रहूंगा।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हेमंत का अध्यक्ष बनना पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम है, जिससे नेतृत्व में स्थिरता और संगठन में ऊर्जा आने की संभावना है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस निर्णय को लेकर खासा उत्साह देखा गया और कई जगहों पर जश्न का माहौल रहा।
हेमंत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए झारखंड को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।


