
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस से पहले ही उन्होंने अपना बहुमत खो दिया है। सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सहयोगी पार्टी मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएमपी) ने अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर पीटीआई से नाता तोड़ लिया है।
31 मार्च को नेशनल असेंबली में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होनी है और तीन अप्रैल को इस पर मतदान होना है। एमक्यूएमपी के इस निर्णय से संयुक्त विपक्ष को इमरान खान को हटाने के लिए अब बागी सांसदों की जरूरत नहीं रही है। जियो न्यूज के अनुसार, एमक्यूएमपी के पीटीआई से अलग होने के बाद निचले सदन में इमरान खान की सरकार ने बहुमत खो दिया है, जिससे उनके सत्ता से बाहर होने की संभावना प्रबल हो गई है।
हालांकि, गृह मंत्री शेख राशिद को अब भी उम्मीद है कि उनकी सरकार अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग में बच जाएगी। उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च को बहस होगी और तीन अप्रैल को मतदान के बाद इमरान खान विजयी रहेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमक्यूएमपी के पीटीआई से अलग होने के बाद नेशनल असेंबली में इमरान खान के समर्थक सांसदों की संख्या घटकर 164 रह गई है, जबकि पहले यह संख्या 171 थी। एमक्यूएमपी के 7 सांसद थे, जिनके अलग होने के बाद विपक्षी सांसदों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है, जो पहले 170 थी।
342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में पीटीआई के 155 सदस्य हैं और सरकार बचाने के लिए उन्हें 172 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। विपक्ष ने 8 मार्च को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसके बाद रैली का आयोजन किया गया। इमरान खान 2018 में ‘नया पाकिस्तान’ बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने में विफल रहने के कारण उनकी सरकार की आलोचना हो रही है।



