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‘लोग मुझे भिखारी समझते थे’, ट्राइसाइ‍किल गिरी तो खाई कसम आज दूसरों को देते हैं लाखों की नौकरी!

जिंदगी में मुश्किलें आती ही हैं। कुछ इनसे डरकर हार मान लेते हैं। तो कई इनका बहादुरी से सामना करते हैं। कुरणेश कुमार (Kurnesh Kumar Success Story) की जिंदगी भी चुनौतियों का पहाड़ रही है। लेकिन, उन्‍होंने कभी हार नहीं मानी। वह हर चुनौती से लड़ते गए और अंत में अपने लिए सफलता का रास्‍ता बना लिया। कुरणेश बचपन से ही चल-फिर नहीं सकते हैं। एक समय था जब लोग उन पर सहानुभूति जताते थे। ट्राइसाइकिल पर देख लोग उन्‍हें भिखारी समझ लेते थे। उन्‍हें कंबल और चिल्‍लर तक देने के लिए आ जाते थे। कुरणेश को समझाना पड़ता था कि वह किसी की दया के मोहताज नहीं हैं। मुश्किल समय में उन्‍होंने पढ़ाई का दामन थामे रखा। फिर एक दिन अपना कोचिंग सेंटर शुरू कर दिया। वह बच्‍चों में बेहद हिट हो गए। उन्‍हें ‘हनी सर’ के नाम से जाना जाने लगा। नौबत यह आ गई कि कुछ समय बाद उन्‍हें टीचर्स रखने पड़े। वह खुद इन टीचरों को लाखों की सैलरी देने लगे।कुरणेश कुमार पंजाब के लुधियाना में रहते हैं। जब वह सिर्फ 5 साल के थे तो उन्हें पोलियो और पैरालिसिस अटैक दोनों साथ आ गए थे। डॉक्टरों ने चार महीने के इलाज के बाद जब अस्‍पताल से छुट्टी की तो दिल को बड़ा सदमा देने वाली बात कही। उन्‍होंने कहा कि कुरणेश के वेस्‍ट के नीचे का हिस्‍सा हमेशा के लिए डेड रहेगा। यानी इसमें किसी तरह की कोई हरकत नहीं होगी। पोलियो और पैरालिसिस अटैक दोनों साथ में आने से उनके शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। पर‍िवार की उस समय फाइनेंशियल कंडीशन बहुत खराब थी। उनके एक छोटा भाई और बड़ी बहन थी। परिवार को उनका इलाज करा पाना भी बहुत मुश्किल पड़ रहा था। डॉक्‍टरों ने उन्‍हें कुछ एक्‍सरसाइज बताईं और दवाएं देकर डिस्‍चार्ज कर दिया।

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