अयूब खान से मुनीर तक, जिन्ना के सपने को पाकिस्तानी जनरलों ने यूं रौंदा, इमरान की गिरफ्तारी से धधका देश
सन् 1947 में मोहम्मद अली जिन्ना ने टू नेशन थ्योरी के साथ ही पाकिस्तान को भारत से अलग कर दिया। बंटवारे के बाद बना यह मुल्क 75 साल बाद भी अपने अस्तित्व को तलाश रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से ही देश में हिंसा का माहौल है। जो वीडियो आ रहे हैं उन्हें देखकर तो किसी गृहयुद्ध का अहसास होने लगता है। आर्थिक संकट के बीच अपने पैरों पर फिर से खड़े होने के रास्ते तलाशता पाकिस्तान आज उस मोड़ पर है जहां पर उसके पूरी तरह से खत्म होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इस मुल्क का इतिहास ऐसा रहा है कि कभी कोई भी साल शांति से नहीं गुजरा। ऐसा लगता है कि एक बार फिर से कुछ बड़ा होने वाला है। एक नजर डालिए कब-कब जिन्ना के पाकिस्तान ने उनके ही सपनों को रौंद दिया गया।पहले विलेन जनरल अयूब खान
जिन्ना के सपनों को रौंदने में पाकिस्तान की सेना और इसके जनरल्स का बड़ा रोल रहा है। अयूब खान की विरासत को पहले जिया उल-हक ने आगे बढ़ाया फिर परवेज मुशर्रफ ने और अब जनरल आसिम मुनीर आगे बढ़ा रहे हैं। सन् 1947 में पाकिस्तान का जन्म हुआ और इसके 11 साल बाद ही देश ने पहली बार तख्तापलट देखा। अयूब खान पर पाकिस्तान की सेना की जिम्मेदारी थी। अक्टूबर 1958 में तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने संविधान को खत्म कर दिया और मार्शल लॉ का ऐलान कर दिया। इसके बाद देश की कमान जनरल (रिटायर्ड) अयूब खान के हाथ में आ गई।11 साल बाद अयूब ने कहा अलविदा
अयूब खान ने 11 साल तक देश पर राज किया और सन् 1969 में सत्ता छोड़ी थी। तख्तापलट के बीच ही सन् 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच पहली जंग छिड़ी। पाकिस्तान को इस जंग में भारत के हाथों मुंह की खानी पड़ी। यह बात और है कि आज भी वह इस जंग में मिली हार को मानने से इनकार कर देता है। इसके बाद सन् 1971 में फिर भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ और फिर पाकिस्तान की सेना को शिकस्त का सामना करना पड़ा। जंग से उबरने के दो साल बाद 10 अप्रैल 1973 को पाकिस्तान के संविधान को मंजूरी मिली। इसके साथ ही जुल्फिकार अली भुट्टो को देश का प्रधानमंत्री चुना गया।




