लालू यादव ने चल दिया है ‘सबसे बड़ा दांव’, लोकसभा चुनाव 2024 में होगी अग्निपरीक्षा
ब्रिटिश से लड़ने में जो विश्वास बाबू कुंवर सिंह को प्राप्त हुआ, वही विश्वास राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद ने काफी अनुभवी राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर किया है। और यही वजह है कि राजद का हाल ही में गठित प्रदेश संगठन एक झलक में न तो एम वाई और न ही ए टू जेड की पुष्टि करते दिखता है। यही वजह भी है कि राजनीतिक गलियारों में राजद के प्रदेश संगठन के नेचर को ले कर जो चर्चा चल रही है, वह एक दूसरे के विरुद्ध खड़ी होते दिखती है। बहरहाल,राष्ट्रीय जनता दल ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी जंग के लिए अपनी सेना तैयार कर ली है। इस चुनाव के परिपेक्ष्य में प्रदेश की कमान यानी सेनापति मेरी जानकारी में पहली बार किसी सवर्ण ने संभाली है। राजद के भीतर इस बदलाव का संकेत भी है। सबसे दिलचस्प तो यह है कि जहां विरोधी दल यह कहते नहीं चुके रहे कि एम वाई की प्राथमिकता वाली कार्यकारिणी लालू प्रसाद स्टाइल की है। तेजस्वी यादव के ए टू जेड समीकरण की हवा निकल गई। लेकिन इस प्रतिक्रिया के विरुद्ध एम वाई के नेता इस कार्यकारिणी में न तो लालू प्रसाद की छाप देख रहे हैं और न ही तेजस्वी यादव की। हां, बाबू वीर कुंवर सिंह को याद करते एम वाई के नाराज नेता इसे राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की छाप मान रहे हैं।
क्यों नाराज है एम वाई नेता?
दरअसल जगदानंद सिंह ने प्रदेश कार्यकारिणी की जो घोषणा की उसमे राज्य स्तर पर जो घोषित पदाधिकारियों की सूची है उसमे एम वाई को वोट बैंक के अनुकूल हिस्सेदारी नहीं मिली है। एक बानगी देखें। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह हैं। विधायक रणविजय साहू को प्रदेश प्रधान महासचिव बनाया गया है। वहीं पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर पूर्व एमएलसी डाॅ. तनवीर हसन, पूर्व मंत्री वृष्णि पटेल, पूर्व मंत्री अशोक कुमार सिंह, पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम, पूर्व मंत्री सुरेश पासवान, पूर्व मंत्री शोभा प्रकाश कुशवाहा, पूर्व विधायक डाॅ विनोद कुमार यादवेन्दु, सिपाही लाल महतो, पूर्व विधायक डाॅ अनिल सहनी, सीताशरण बिन्द, मो. मुजफ्फर हुसैन राही, पूर्व एमपी राजेश कुमार मांझी, विधायक भूदेव चैधरी, पूर्व एमपी विश्वमोहन कुमार मंडल, पूर्व एमएलसी गणेश भारती, विनोद कुमार श्रीवास्तव, पूर्व एमएलसी लाल दास राय और मधु मंजरी को बनाया गया है।इसके साथ ही कोषाध्यक्ष मो कामरान को बनाया है। राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन की ही माने तो प्रदेश अध्यक्ष सहित राज्यस्तरीय कुल 21 पद में दो यादव ,दो मुस्लिम, एक कुर्मी, दो कुशवाहा, छह अति पिछड़ा, एक कायस्थ, दो राजपूत, रविदास, पासवान, पासी और मुसहर को एक एक स्थान मिला है। इस मुख्य कमिटी में भूमिहार और ब्राह्मण को स्थान नहीं मिला है। हालांकि खुल कर राजद नेता नहीं बोलते पर बताते हैं कि संगठन में एम वाई की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक होती थी। इसकी वजह भी थी कि राजद के आधार वोट यानी एम वाई तकरीबन 30 से 35 प्रतिशत अपनी निरंतरता के साथ राजद के लिए सुनिश्चित रहा।




