मेरे साथी मारे गए, कभी वापस नहीं लौटूंगा… सूडान से लौटे भारतीयों की खौफनाक आपबीती
सूडान से रेस्क्यू कर भारत लाए गए लोगों की आपबीती सन्न कर देने वाली है। कई तो दशकों से वहां रह रहे थे तो कुछ का जन्म-कर्म भी वहीं हुआ। भारत पहुंचने पर एक तरफ तो उन्हें खुशी है कि जान बच गई तो दूसरी तरफ घर छूटने का दर्द भी है। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को अपनी जो आपबीती बताई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। अबतक करीब 1100 भारतीयों को सूडान से सुरक्षित निकाला जा चुका है। बुधवार को 367 भारतीय सऊदी के जेद्दा से स्पेशल फ्लाइट के जरिए दिल्ली लाए गए। वहीं गुरुवार को 246 अन्य भारतीय मुंबई पहुंचने वाले हैं।डॉक्टर रुपेश गांधी सूडान में ही जन्मे और पले-बढ़े। बुधवार रात को जब वह दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड किए तो राहत की सांस ली। मौत के मुंह से बाहर जो आए हैं। वह हिंसा की आग में जल रहे सूडान में फंसे उन 367 भारतीयों में से एक हैं जिन्हें सरकार ने ऑपरेशन कावेरी के तहत रेस्क्यू किया है। गुजरात की रहने वाली अपनी पत्नी रीना के साथ एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त रुपेश का दर्द छलक गया। उन्होंने आपबीती सुनाई, ‘भारी गोलीबारी और बमबारी जारी है। मेरे साथी मारे गए। मैं कभी सूडान नहीं जाऊंगा।’
रीना ने बताया कि सूडान में पिछले कुछ दिन किसी भयावह सपने की तरह थे। वे बिना बिजली और पानी के तड़प रहे थे, जिंदा रहने के लिए जूझ रहे थे। ये कपल उन 367 यात्रियों में शामिल था जिन्हें सऊदी अरब की पोर्ट सिटी जेद्दा से स्पेशल फ्लाइट के जरिए दिल्ली लाया गया। वे पोर्ट सूडान से जेद्दा पहुंचे थे। सूडान में पिछले कई दिनों से वहां की सेना और मुख्य अर्धसैनिक बलों के बीच भीषण संघर्ष हो रहा है।
‘जय श्री राम’ का नारा लगाते प्लेन से बाहर आए कई यात्री
बुधवार रात को 9 बजकर 11 मिनट पर स्पेशल फ्लाइट जब दिल्ली में लैंड हुई तब कई यात्री खुशी से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए बाहर निकले।




