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21 साल पुराने नरोदा गाम नरसंहार केस में कब-क्या हुआ? 12 प्वाइंट्स में समझिए

गुजरात में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों सैकड़ों लोग मारे गए थे। इसके बाद सांप्रदायिक हिंसा की नौ घटनाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) को सौंपी गई थी। इन्हीं में एक केस नरोदा गांव (गुजराती में गाम) में हुई सांप्रदायिक हिंसा का था। 28 फरवरी, 2002 को हुई घटना में 4 महिलाओं समेत एक समुदाय के 11 लोग मारे गए थे। इसके बाद पुलिस ने 86 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, बाद में निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को केस सौंपा था। देखिए 21 साल पुराने इस केस में कब क्या हुआ?

नरोदा गाम नरसंहार के अहम पड़ाव:

  • मई, 2002: छह गवाहों ने एसीपी पी एन बारोट के सामने तत्कालीन बीजेपी विधायक माया कोडनानी का नाम लिया, लेकिन कोडनानी का नाम एफआईआर में नहीं शामिल हुआ।
  • 21 नवंबर, 2003: सुप्रीम कोर्ट नौ सांप्रदायिक दंगों को कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाई।
  • 26 मार्च, 2008: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीबीआई चीफ आरके राघवन की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया।
  • 29 मई, 2008: गवाहों ने एसआईटी के सामने माया कोडनानी का नाम लिया।
  • 12 दिसंबर,2008: एसआईटी ने पहली चार्जशीट दाखिल की, इसमें कोडनानी का नाम नहीं था।
  • 28 दिसंबर, 2008: माया कोडनानी एसआईटी के सामने पेश हुई और हिंसा में कोई भूमिका होने से इंकार किया।
  • 5 फरवरी, 2009: सेशंस कोर्ट ने माया कोडनानी को अग्रिम जमानत दे दी।
  • 27 मार्च, 2009: गुजरात हाईकोर्ट ने माया कोडनानी की बेल खारिज की, माया कोडनानी ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर सरेंडर किया।
  • 1 मई, 2009: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर लगी रोक को हटाया।
  • 30 सितंबर, 2009: इस मामले अदालत ने कुल 81 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।
  • 18 सितंबर, 2017: बीजेपी ने (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह माया कोडनानी का बचाव में पेश हुए।
  • 04 अप्रैल, 2023: अहमदाबाद की विशेष कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई। कोर्ट ने 20 अप्रैल को फैसला सुनाने को कहा।
  • 20 अप्रैल, 2023: कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

कहीं खुशी, कहीं गम:

21 साल पुराने मामले में कुल 86 लोगों को आरोपी बनाया गया था। केस की जांच और ट्रायल के दौरान 18 आरोपियों की मौत हो गई। तो वहीं एक व्यक्ति को कोर्ट ने छोड़ दिया। 20 अप्रैल, 2023 को स्पेशल कोर्ट ने बचे 67 आरोपियों को बरी कर दिया।

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