लालू-आलू-बालू… ये कॉम्बिनेशन आज भी बिहार में ‘खिलाड़ी नंबर-1’, समझिए कैसे
पटना: बिहार के लिए सबसे बुरा दिन माना गया था, जब बिहार से झारखंड को अलग कर दिया गया था। हालांकि तब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा था कि मेरी लाश पर झारखंड का बंटवारा होगा। मगर, वो दिन भी आया जब बिहार से झारखंड अलग हो गया। तारीख थी 15 नवंबर और वर्ष था 2000। यह वही वक्त था, जब बिहार के संदर्भ में टिप्पणी की गई थी कि बिहार में अब रह क्या गया लालू, बालू और आलू। सच में सारे उद्योग धंधे और खनिज संपदा झारखंड में चले गए। लेकिन समय-समय की बात होती है। बिहार में लालू, बालू और आलू अपनी बुलंदियों के साथ आज भी अपनी अहमियत का भान कराते हैं। राजनीतिक जगत में राजद सुप्रीमो का एमवाई समीकरण और सामाजिक न्याय के नाम पर जो अलख जगाया, वो आज भी हर दल की जरूरत बन चुकी है। आलू के उत्पादन में बिहार ने रिकॉर्ड कायम किया। देश के टॉप तीन राज्यों में शुमार है।




