महाकुंभ भगदड़ की जांच का दायरा बढ़ाया, मौतों और संपत्ति नुकसान की भी होगी जांच.
प्रयागराज: महाकुंभ में हुई भगदड़ की न्यायिक जांच का दायरा अब बढ़ा दिया गया है।
राज्य सरकार ने अब इस जांच में मौतों और संपत्ति के नुकसान को भी शामिल कर लिया है।
सोमवार को राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ को इस फैसले की जानकारी दी।
इस निर्णय के बाद अदालत ने भगदड़ की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की।
याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय ने दायर की थी।
याचिका में कहा गया था कि न्यायिक आयोग की जांच का दायरा सीमित था, जिसमें जान-माल का नुकसान शामिल नहीं था।
याचिका में मांग की गई थी कि आयोग यह पता लगाए कि हादसा कैसे हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव दे।
पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार से हादसे की न्यायिक निगरानी और लापता लोगों की सही गिनती पर जवाब मांगा था।
अदालत ने पूछा था कि क्या आयोग के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाकर मृतकों की पहचान और अन्य चिंताओं को भी शामिल किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता के वकील सौरभ पांडेय ने मृतकों की आधिकारिक संख्या को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों में 30 मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में यह संख्या अधिक बताई गई है।
उन्होंने PUCL (पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज) की प्रेस रिलीज़ का हवाला देते हुए सरकारी आंकड़ों पर संदेह जताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृतकों के परिवारों को डेथ सर्टिफिकेट पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई परिवारों का आरोप है कि अधिकारी पोस्टमार्टम के बिना सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15,000 रुपये की मांग कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
अदालत ने जांच की प्रगति पर अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।


