उनके अंतिम संस्कार में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभिन्न संगठनों के कई नेता और समर्थक एकत्रित हुए, जिन्होंने सुधाकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुधाकर, जो कई सालों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए थे, हाल ही में [स्थान, यदि उपलब्ध हो] में एक मुठभेड़ में मारे गए थे। उनके निधन ने नक्सली आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी रखी गई थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस दौरान, माओवादी समर्थक समूहों ने सुधाकर को एक शहीद के रूप में चित्रित किया, जबकि सुरक्षा बलों ने उनके खिलाफ चलाए गए सफल अभियान को अपनी जीत बताया। सुधाकर का अंतिम संस्कार एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, जो क्षेत्र में नक्सलवाद और राज्य के बीच चल रहे जटिल संघर्ष को दर्शाता है।


