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त्रिशूर के दो नागरिक रूस में फंसे, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने की मदद की पहल.

तिरुवनंतपुरम: त्रिशूर के दो निवासी, जैन और बिनिल, जो रूस में गंभीर परिस्थितियों में फंसे हुए हैं, के मामले में केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने हस्तक्षेप किया है।

इन दोनों को रोजगार के झांसे में रूस भेजा गया था लेकिन उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।

मुख्य बिंदु:

  1. जैन और बिनिल को रोजगार एजेंटों ने इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर की नौकरी का झांसा दिया।
  2. अप्रैल 4 को दोनों रूस पहुंचे, लेकिन उनके भारतीय पासपोर्ट जब्त कर लिए गए।
  3. उन्हें रूसी सैन्य सहायता सेवा में भेजा गया और युद्ध क्षेत्र में काम कराया गया।
  4. बिनिल की पत्नी जोईसी ने बताया कि दोनों को ₹2 लाख मासिक वेतन का वादा किया गया था।
  5. अब तक दोनों को कोई भुगतान नहीं मिला और वे अपने परिवार को पैसे नहीं भेज पाए।

सुरेश गोपी का हस्तक्षेप:
6. परिवार ने मदद के लिए सुरेश गोपी से संपर्क किया।
7. मंत्री ने तुरंत भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर उनकी रिहाई की मांग की।
8. उन्होंने दूतावास से मामले में जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई।
9. सुरेश गोपी ने पुष्टि की कि वे दूतावास से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

परिवारों की चिंता:
10. जैन और बिनिल के परिवार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
11. उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है क्योंकि दोनों परिवारों को कोई मदद नहीं मिली।
12. परिवार ने सुरेश गोपी के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।

मामले की गंभीरता:
13. यह मामला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
14. रोजगार एजेंटों द्वारा धोखाधड़ी की जांच की मांग उठ रही है।
15. सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद है।

अगले कदम:
16. भारतीय दूतावास से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
17. परिवारों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप की अपील की।
18. मंत्री ने मामले को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया।

समाज की प्रतिक्रिया:
19. यह मामला रोजगार के नाम पर हो रही धोखाधड़ी पर प्रकाश डालता है।
20. लोगों ने सरकार से ऐसे मामलों में कड़ी क

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