सिक्किम में शांत तीस्ता नदी ने कैसे मची तबाही? ल्होनक झील पर बादल फटने के बाद क्या हुआ, जानिए
उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील (Lhonak Lake) पर बादल फटने से बड़ी तबाही मची है। बादल फटने के कारण् तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ (Sikkim Flood) आ गई। इस घटना में अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं सेना के 23 जवान समेत 102 लोग लापता बताए गए हैं। हादसे के बाद दिख रहा मंजर बाढ़ की भयावहता बयां कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अचानक यह तबाही कैसे मची। क्या मंगलवार को नेपाल और उसके आस-पास के क्षेत्र में आया जोरदार भूकंप ही सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने और तीस्ता नदी में अचानक आई बाढ़ की असली वजह है? फिलहाल इस बात का पता वैज्ञानिक लगा रहे हैं। दरअसल ल्होनक झील पर बादल के फटने से चुंगथांग बांध भी बह गया। जो कि राज्य का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है। यह 1,200 मेगावाट तीस्ता चरण तीन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें राज्य सरकार प्रमुख रूप से हिस्सेदार है।
सिक्किम में कैसे मची तबाही? वैज्ञानिक लगाएंगे पता

हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से जारी सैटेलाइट चित्रों से पता चला है कि दक्षिणी ल्होनक झील का क्षेत्रफल, 17 सितंबर की तुलना में 100 हेक्टेयर से अधिक कम हो गया है। यानी बुधवार को बादल फटने के बाद सिक्किम की ल्होनक झील का लगभग 65% हिस्सा बह गया। इसके कारण तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ आ गई। एनआरएससी ने झील की घटना से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें शेयर की हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 22 सैन्यकर्मियों समेत 102 लोग लापता हैं।
झील ही है तबाही की वजह?

नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि झील लगभग 162.7 हेक्टेयर में फैली हुई थी। 28 सितंबर को इसका क्षेत्रफल बढ़कर 167.4 हेक्टेयर हो गया और भारी गिरावट के साथ 60.3 हेक्टेयर रह गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख केंद्रों में से एक राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर ने जल निकाय पर अस्थायी सैटेलाइट चित्र (पहले और बाद) प्राप्त करके सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने के बारे में एक उपग्रह-आधारित अध्ययन किया है।



