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बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर राज्य में श्रद्धा का माहौल दिखा.

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने समाधि स्थल पहुंचकर शहीद को नमन किया.

रांची में धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बड़ा आयोजन हुआ। कोकर स्थित समाधि स्थल पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ जुटी रही। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सबसे पहले पहुंचकर उन्हें याद किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कुछ देर बाद पहुंचे। उन्होंने समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित किया। विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। तीनों नेताओं ने आदिवासी समाज के संघर्ष की विरासत को याद किया। बिरसा मुंडा को झारखंड की आत्मा कहा गया। नेताओं ने कहा कि उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह अवसर राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा जनजातीय समाज की उम्मीद थे। उन्होंने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके नेतृत्व ने समाज में नई चेतना जगाई। सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर श्रद्धांजलि की तस्वीर भी साझा की। उन्होंने लिखा कि धरती आबा अमर रहें। राज्यपाल ने कहा कि उनके विचार आज भी मार्गदर्शक हैं। जनप्रतिनिधियों ने वहां मौजूद भीड़ से उनके आदर्शों पर चलने की अपील की। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। कई सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। वातावरण श्रद्धा और सम्मान से भरा रहा।

सीएम ने कार्यक्रम में विकास योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अबुआ सरकार आदिवासी समाज की उन्नति के लिए काम कर रही है। महिलाओं के सम्मान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने की कोशिश जारी है। बच्चों की शिक्षा को और मजबूत बनाया जा रहा है। झारखंड की संस्कृति और भाषा को बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा का सपना सामाजिक न्याय था। उन्होंने राज्यवासियों से उनके आदर्श अपनाने की अपील की। उन्होंने जय झारखंड का नारा भी दिया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

 

 

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