पाकिस्तान का इतिहास झूठा… जिन्ना के देश में रहने वाले हिंदुओं ने धो डाला, खुलेआम की भारत की तारीफ
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। लेकिन भारत के साथ ही आजाद हुआ देश पाकिस्तान आज कंगाली से जूझ रहा है। धर्म के नाम पर पाकिस्तान बना था। लेकिन पाकिस्तान ऐसा कोई काम नहीं कर सका, जिससे भारत सीख सके। पाकिस्तान ने अपनी किताबों तक में अल्पसंख्यकों और खास तौर पर हिंदुओं के खिलाफ जहर ही उगला है। इस बीच पाकिस्तान में रह रहे ऐसे हिंदू जो भारत में अपनी शिक्षा पा चुके हैं उन्होंने भारतीय एजुकेशन सिस्टम की जमकर तारीफ की।
पाकिस्तानी यूट्यूबर सुहैब चौधरी ने पाकिस्तान के हिंदुओं से बातचीत की। वीडियो में उन्होंने कराची के युवाओं से बात की, जिनमें से कुछ ने भारत के स्कूलों में पढ़ाई की है। इन युवाओं ने बताया कि भारत की सरकारें लगातार विकास से जुड़े काम कर रही हैं। भारत के सरकारी दफ्तर, सड़कें पाकिस्तान से अच्छी हैं। सुमित नाम के एक युवा ने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या टैलेंट को बढ़ावा न देना है। उन्होंने कहा है कि ऐसा व्यक्ति जिसके पास टैलेंट है उसके लिए पाकिस्तान में कोई नौकरियां ही नहीं है। वहीं भारत में टैलेंटेड लोगों के लिए नौकरियों के खुले दरवाजे हैं।
कराची में नहीं है सुरक्षा
सुहैब ने जब यश नाम के युवा से पूछा कि कराची तो सिटी ऑफ लाइट है तो उसने कहा कि सभी लाइटें जलाने से ऐसा नाम नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कराची पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर है, लेकिन यहां सुरक्षा जैसी कोई चीज नहीं है। हर कोई ऐसी जगह रहना चाहेगा, जहां अच्छा एजुकेशन हो, जहां हम रात में आराम से निकल सकें और खाना खा सकें। ये डर नहीं रहना चाहिए कि हम बाहर निकलेंगे और कोई हमसे हमारा मोबाइल छीन कर ले जाएगा। यश ने आगे कहा कि वह विदेश में शिफ्ट होना चाहता है। मौका लगा तो वह अपने पेरेंट्स को भी साथ ले जाएगा।
छह बजे के बाद नहीं निकल सकते हिंदू
अल्पसंख्यकों के हवाले से बातचीत में यह भी निकल कर आया कि सिंध के ग्रामीण इलाकों में पुलिस ने हिंदुओं से छह बजे के बाद न निकलने को कहा है। यह पूछे जाने पर क्यों, तो यश ने जवाब दिया कि पुलिस का कहना है हम सिक्योरिटी नहीं दे पाएंगे। यह पूछे जाने पर कि आखिर किससे खतरा है, इस पर वह कहता है कि नाम लेना ठीक नहीं रहेगा। एजुकेशन सिस्टम पर बातचीत में वह कहता है कि मुझे लगता है कि पाकिस्तान की हिस्ट्री झूठी है। यहां आजादी की लड़ाई में उन लोगों के योगदान को नहीं गिना जाता जो भारत में रहे। उन्हें सिर्फ टू नेशन थ्योरी में पढ़ाया जाता है। योगेश नाम के एक लड़के ने कहा कि वह भारत के अहमदाबाद से पढ़ा है। वहां के कई स्कूल बच्चों को 5वीं के बाद से कोडिंग जैसी चीजों के बारे में बताने लगते हैं। जबकि पाकिस्तान में यह इंटरमीडिएट तक नहीं सिखाया जाता।




